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‘शिक्षक शौर्य दिवस’ पर 31 शिक्षकों का सम्मान, हर साल 10 जुलाई को मनाने का प्रस्ताव

लखनऊ। स्ववित्तपोषित विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन की ओर से रक्षा मंत्री एवं पूर्व शिक्षक राजनाथ सिंह के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को सहकारिता भवन में ‘शिक्षक शौर्य दिवस’ का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 31 शिक्षकों को सम्मानित किया।

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

‘शिक्षक राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति’

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों का भी निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान एसोसिएशन की ओर से प्रदेशभर के 1100 शिक्षकों को सम्मानित किए जाने की जानकारी भी दी गई।

राजनाथ सिंह के शिक्षक जीवन को किया याद

प्रदेश अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत भौतिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में की थी। शिक्षक से देश के रक्षा मंत्री तक का उनका सफर परिश्रम, अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की प्रेरक मिसाल है।

हर साल 10 जुलाई को मनाने का प्रस्ताव

कार्यक्रम में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष 10 जुलाई को ‘शिक्षक शौर्य दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस संबंध में एसोसिएशन ने उप मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर शासनादेश जारी करने की मांग भी की।

समारोह में विराज सागर, राजेश यादव, रितेश श्रीवास्तव, डॉ. अजीज खान और रामशंकर राजपूत सहित कई वक्ताओं ने शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

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