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ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली कंपनियों पर अंतरिम जांच रिपोर्ट तैयार, शासन को भेजी गई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली आउटसोर्स एजेंसियों पर लगे कथित रिश्वतखोरी, अवैध वसूली और कर्मचारियों के शोषण के आरोपों की जांच को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। परिवहन विभाग ने मामले की अंतरिम जांच रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद जांच प्रक्रिया में तेजी आई है। अब श्रम विभाग से भी कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच कराने की तैयारी है।

ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली आउटसोर्स एजेंसियों फोकॉम.नेट, सिल्वर टच और रोजमार्टा के खिलाफ मिली शिकायतों को जांच के दायरे में रखा गया है।

अनुबंध की शर्तों की भी हो रही जांच

जांच अधिकारी केडी सिंह गौड़ के मुताबिक, जांच पूरी कर रिपोर्ट परिवहन आयुक्त के माध्यम से शासन को भेज दी गई है। हालांकि, यह रिपोर्ट फिलहाल अंतरिम है। जांच के दौरान कुछ ऐसे बिंदु सामने आए हैं, जिन पर कार्यदाई संस्थाओं द्वारा अनुबंध की शर्तों का पालन किया गया या नहीं, इसकी जानकारी श्रम विभाग से मांगी गई है।

इसके अलावा कर्मचारियों से जुड़े मामलों को देखते हुए श्रम विभाग से भी जांच का अनुरोध किया गया है। श्रम विभाग से जानकारी मिलने के बाद उसे अंतिम जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

एक और जांच समिति गठित

एक जांच पूरी होने के बाद परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने 16 जुलाई को स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस निर्माण कार्य के लिए नामित तीन कार्यदाई संस्थाओं के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक और समिति गठित की है।

इस समिति में राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव सगीर अहमद अंसारी, अपर सचिव अजय कुमार और लखनऊ संभाग के आरटीओ (प्रवर्तन) प्रभात पांडेय को शामिल किया गया है। इसके अलावा अपर परिवहन आयुक्त (आईटी) के अधीन एक अलग सेल का भी गठन किया गया है।

31 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

गठित सेल में एक लिपिक और एक डीबीए को शामिल किया गया है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट परिवहन आयुक्त के सामने प्रस्तुत करनी है। इसके लिए 31 जुलाई तक की समय सीमा निर्धारित की गई है।

जांच अधिकारी केडी सिंह गौड़ ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि कंपनियों ने बिना उचित कारण और बिना नोटिस के कर्मचारियों को नौकरी से हटाया है, तो इसके लिए संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। फिलहाल श्रम विभाग से मांगी गई जानकारी का इंतजार है, जिसके बाद जांच को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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