प्रदेश में मत्स्य उत्पादन और उससे जुड़े कारोबार को नई रफ्तार देने के लिए सरकार ने बड़ी पहल शुरू की है। इसके तहत अत्याधुनिक होल सेल फिश मंडी, एकीकृत एक्वा पार्क और मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। मत्स्य विभाग ने योजना को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
पहले चरण में गोरखपुर और मुरादाबाद में होल सेल फिश मंडी विकसित की जाएगी। वहीं गोरखपुर में एकीकृत एक्वा पार्क और मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। इसके लिए मुरादाबाद में 4.84 एकड़ और गोरखपुर में करीब 27 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।
परियोजना के तहत मत्स्य उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और परिवहन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही जल पर्यटन, मनोरंजन और जलीय कृषि आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में फिश मंडी निर्माण के लिए 24-24 करोड़ रुपये, एक्वा पार्क के लिए 40 करोड़ रुपये और मत्स्य प्रसंस्करण इकाई के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर किया जाएगा।
इसके लिए इच्छुक व्यक्तियों और संस्थाओं से अभिरुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) आमंत्रित की जाएगी। योजना के संचालन और निगरानी के लिए अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन होगा।
मत्स्य विभाग का मानना है कि यह योजना मत्स्य पालन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी। इससे मत्स्य पालकों को आधुनिक बाजार, बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाएं मिलेंगी। अभी किसानों और कारोबारियों को संगठित बाजार और आधुनिक सुविधाओं के अभाव में नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन नई व्यवस्था से उन्हें बेहतर कीमत मिलने के साथ बिचौलियों पर भी अंकुश लगेगा।
सरकार का कहना है कि इस पहल से युवाओं, व्यापारियों और उद्यमियों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा और प्रदेश में मत्स्य उत्पादन व निर्यात क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
