उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार देने, गोवंश के लिए त्वरित उपचार व्यवस्था विकसित करने और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं।
शनिवार को लोकभवन में नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए, वहीं गोवंश संरक्षण और आपदा राहत को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
818 युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न विभागों में चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान नवचयनित युवाओं ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों की मेहनत और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को दिया। मुख्यमंत्री ने युवाओं से शासन का हिस्सा बनकर ईमानदारी और निष्ठा के साथ प्रदेश की जनता की सेवा करने की अपील की।
फार्मासिस्ट अंशु गुप्ता ने कहा कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी होने से उनका सरकारी नौकरी का सपना पूरा हुआ। प्रोफेसर डॉ. रेखा पलावत ने बताया कि वह किसान परिवार से आती हैं और माता-पिता के सहयोग से यहां तक पहुंचीं। एक्स-रे टेक्नीशियन सरिता सोनी समेत अन्य चयनित अभ्यर्थियों ने भी नियुक्ति पत्र मिलने पर खुशी जताई और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
हर जिले में गोवंश के लिए इमरजेंसी रेस्क्यू सिस्टम
सरकार प्रदेश के हर जिले में घायल गोवंश के लिए आपातकालीन बचाव और त्वरित उपचार की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने गोशालाओं में भरण-पोषण, साफ-सफाई, हरे चारे, भूसे, पेयजल और आश्रय व्यवस्था की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं।
लम्पी और खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए समयबद्ध टीकाकरण और संक्रमित पशुओं को तत्काल उपचार देने पर जोर दिया गया है। गोशालाओं के निरीक्षण में सामने आने वाली कमियों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके साथ ही पंचगव्य आधारित चिकित्सा की संभावनाओं पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने की तैयारी है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, लखनऊ में शोध को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।
गो आधारित उत्पादों से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा
गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ, किसानों और गोपालकों को गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग, मूल्यवर्धन और विपणन से जोड़ने की योजना है।
गोबर-गोमूत्र से जैविक खाद, जीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीट नियंत्रक और बायोगैस जैसे उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय किसानों के जरिए चारा उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
आपदा प्रभावितों को 249.76 करोड़ रुपये की राहत
प्रदेश में 1 अप्रैल से 18 सितंबर 2026 तक विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों और परिवारों को कुल 249.76 करोड़ रुपये की राहत सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसमें अतिवृष्टि, वज्रपात, सर्पदंश, बाढ़, मानव-वन्यजीव द्वंद्व, ओलावृष्टि, डूबने, अग्निकांड और आंधी-तूफान जैसी घटनाएं शामिल हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 1.16 लाख किसानों को फसल क्षति के लिए 72.31 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। वहीं 23,595 क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 15.09 करोड़ रुपये और 1,519 पशुहानि के मामलों में 5.25 करोड़ रुपये की राहत राशि वितरित की गई है। आपदाओं में घायल 183 लोगों को 19.90 लाख रुपये की सहायता दी गई।
जनहानि के मामलों में प्रभावित परिवारों को अब तक 156.92 करोड़ रुपये की राहत सहायता दी गई है। सरकार के अनुसार, आपदा प्रभावित परिवारों तक जल्द आर्थिक मदद पहुंचाने और संकट के समय उन्हें सहारा देने के लिए राहत व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखा जा रहा है।
