Union Public Service Commission की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 खत्म होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने इसे “अब तक का सबसे कठिन पेपर” बताया तो किसी ने इसे पूरी तरह “Luck Based” परीक्षा करार दिया। X, Instagram और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म्स पर छात्रों ने लंबे पोस्ट लिखकर अपनी परेशानी साझा की।
कई अभ्यर्थियों का कहना है कि इस बार सवाल लंबे, घुमावदार और पूरी तरह अनप्रेडिक्टेबल थे। छात्रों के मुताबिक पेपर का पैटर्न पिछले वर्षों से काफी अलग था, जिससे तैयारी के बावजूद प्रश्नों को समझना मुश्किल हो रहा था।
छात्रों को क्यों लगा सबसे कठिन पेपर?
परीक्षा के बाद सोशल मीडिया पर “Toughest UPSC Paper Ever” तेजी से ट्रेंड करने लगा। छात्रों ने दावा किया कि इस बार केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि रणनीति और अनुमान लगाने की क्षमता भी अहम रही। कई अभ्यर्थियों को लगा कि परीक्षा ज्ञान से ज्यादा मानसिक दबाव की परीक्षा बन गई थी।
कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि कई सवाल ऐसे विषयों से पूछे गए, जिनकी उम्मीद बेहद कम थी। परीक्षा केंद्रों के बाहर भी छात्रों में घबराहट और कन्फ्यूजन साफ नजर आया।
क्या सोशल मीडिया ने बढ़ाया डर?
UPSC मेंटर विरोनिका ने सोशल मीडिया पर कहा कि हर साल परीक्षा के बाद ऐसा माहौल बनता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी छात्रों ने कटऑफ बहुत कम जाने की बात कही थी, लेकिन बाद में वास्तविक स्थिति अलग निकली।
उन्होंने अपने एक छात्र का मैसेज साझा करते हुए कहा कि पेपर शुरू में सामान्य लगा था, लेकिन बाहर निकलने के बाद जब बाकी छात्रों को “बहुत कठिन” कहते सुना तो वह खुद भी घबरा गया।
शिक्षकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर पैनिक बहुत तेजी से फैलता है और इसका असर उन छात्रों पर भी पड़ता है, जिन्हें पहले पेपर ठीक लगा था।
क्या UPSC 2026 ‘Luck Based’ परीक्षा थी?
कुछ छात्रों और एक्सपर्ट्स ने इस परीक्षा को “Luck Based” तक बता दिया। UPSC मेंटर Dr. Shivin ने कहा कि इस बार पेपर में किस्मत का रोल ज्यादा दिखाई दिया।
हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि UPSC हमेशा से छात्रों को चौंकाने वाला पैटर्न अपनाता रहा है। आयोग का उद्देश्य केवल रटकर पढ़ने वाले नहीं, बल्कि स्मार्ट और विश्लेषणात्मक तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को आगे लाना होता है।
आखिर क्या है पूरी सच्चाई?
विशेषज्ञों के अनुसार UPSC Prelims 2026 कठिन जरूर था, लेकिन इसे इतिहास का सबसे कठिन पेपर कहना जल्दबाजी हो सकती है। इस बार परीक्षा का पैटर्न पारंपरिक शैली से अलग और ज्यादा विश्लेषणात्मक था।
कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी रहे जिन्होंने पेपर को संतुलित बताया और अब सीधे मेन्स परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं।
UPSC ने यह परीक्षा 26 मई को आयोजित की थी, जिसमें करीब 8.19 लाख उम्मीदवार शामिल हुए। अब सभी की नजर आधिकारिक आंसर-की और कटऑफ पर टिकी है। आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा कि सोशल मीडिया पर फैला डर वास्तविक था या सिर्फ परीक्षा के बाद की घबराहट।
