नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर हुई अहम वोटिंग में बिल पारित नहीं हो सका। मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 300 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी।
बिल के पारित न होने के बाद सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कहा कि यह विधेयक संविधान पर हमला था और इसे रोकना जरूरी था। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण लागू करना है, तो पहले पारित बिल को लागू किया जाए, जिसमें विपक्ष पूरा समर्थन देगा।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र और देश की अखंडता से जुड़ा विषय था। उन्होंने परिसीमन से जुड़े प्रावधानों पर आपत्ति जताई।
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन कुछ प्रावधानों को लेकर विपक्ष ने अपनी स्पष्ट रेखा खींची।
कांग्रेस नेता शशि थरूर और कार्ति चिदंबरम ने भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि उससे जुड़े अन्य प्रावधानों से था।
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
भाजपा ने बिल पारित न होने पर नाराजगी जताई। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर महिला सशक्तिकरण का विरोध करने का आरोप लगाया।
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने इसे महिलाओं के मनोबल को ठेस पहुंचाने वाला बताया, जबकि सांसद हेमा मालिनी ने भी बिल पास न होने पर निराशा जताई।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विपक्ष पर राजनीति करने और महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने का आरोप लगाया।
आगे क्या?
बिल के पारित न होने के बाद फिलहाल इसकी आगे की प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।
