न्यूज डेस्क ,लखनऊ
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे कर्मचारियों के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) का शुभारंभ किया।
नई व्यवस्था के जरिए प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण को एक संस्थागत और डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की शुरुआत की गई है।
इस व्यवस्था से प्रदेश के करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ कर्मचारियों को समय पर वेतन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
ऑनलाइन होगी भर्ती, मेरिट और आरक्षण का पालन
UPCOS के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाएगा। चयन में योग्यता और मेरिट के साथ प्रदेश की आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा। SC, ST, OBC, EWS, दिव्यांगजन, महिलाओं, पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को नियमों के अनुसार आरक्षण का लाभ मिलेगा।
श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों पर भर्ती के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। वहीं विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का प्रावधान भी किया गया है।
हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच मिलेगा वेतन
नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक उपलब्ध कराने का प्रावधान है। वेतन सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में भेजा जाएगा।
इसके साथ ही EPF और ESIC से जुड़े कर्मचारियों के खाते खुलवाने और नियमित अंशदान जमा कराने की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। एजेंसियों को इसका प्रमाण निर्धारित समय के भीतर निगम को देना होगा।
मनमाने तरीके से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी
आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी नई व्यवस्था में प्रावधान किए गए हैं। आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी को मनमाने तरीके से सेवा से नहीं हटा सकेगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति जरूरी होगी।
एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेगी पूरी जानकारी
UPCOS के तहत कर्मचारी अपने सर्विस रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट, उपस्थिति और भुगतान से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से देख सकेंगे। कर्मचारी अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करने के साथ उसकी स्थिति भी ट्रैक कर सकेंगे।
सरकार की ओर से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी।
मातृत्व अवकाश और वैधानिक सुविधाओं पर जोर
नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभ उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। EPF, ESIC और बैंकिंग से जुड़ी अनुमन्य सुविधाओं को कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
₹40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा
UPCOS के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के तहत निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार कर्मचारियों को करीब ₹40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जाएगा।
स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए ₹10 लाख तक, आकस्मिक दवाओं के लिए ₹5 लाख तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए ₹10 लाख तक की सुविधा का प्रावधान किया गया है।
परिवार को भी मिलेगा आर्थिक सहारा
सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी के परिवार तक भी बढ़ाया है। किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में कर्मचारी के बच्चों की शिक्षा और परिवार की अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।
कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए ₹8 लाख तक और पुत्री की शिक्षा के लिए ₹10 लाख तक की सहायता दी जाएगी। दो पुत्रियों के विवाह के लिए ₹8 से ₹10 लाख तक सहायता और अंतिम संस्कार के लिए ₹50 हजार तक की व्यवस्था का प्रावधान है।
कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो-बैलेंस बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष बैंकिंग योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था होगी।
एजेंसी और विभाग की जवाबदेही होगी तय
UPCOS के जरिए आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और संबंधित विभाग की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएंगी। एजेंसियों का चयन और इंपैनलमेंट तय प्रक्रिया के तहत होगा। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के जरिए जवाबदेही तय की जाएगी।
भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और अन्य सेवा सुविधाओं की डिजिटल निगरानी की जाएगी। इससे कर्मचारियों को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से प्रदेश के करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और नौकरी से जुड़ी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
