रिपोर्ट: न्यूज डेस्क, कानपुर
कानपुर देहात। योगी सरकार ने अपराध और जालसाजी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कानपुर देहात में दो कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई की है। थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के लिए आवंटित करीब 944.029 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया है। अब यह पूरी जमीन सरकार के पक्ष में दर्ज की जाएगी।
यह जमीन वर्ष 2011 में मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड और मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को पावर प्लांट स्थापित करने के उद्देश्य से भोगनीपुर तहसील क्षेत्र में आवंटित की गई थी। आरोप है कि जमीन मिलने के करीब 15 साल बाद भी दोनों कंपनियों ने पावर प्लांट का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। इतना ही नहीं, अनुबंध की शर्तों के विपरीत सरकार की अनुमति के बिना जमीन को अलग-अलग बैंकों में गिरवी रख दिया गया।
बिना अनुमति बैंकों में गिरवी रखी जमीन
जांच के दौरान सामने आया कि दोनों कंपनियों ने एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन करते हुए सरकार की अनुमति के बिना जमीन को बैंकों में बंधक रख दिया। समझौते के मुताबिक कंपनियां राज्य सरकार की अनुमति के बिना जमीन को बेच, लीज पर या गिरवी नहीं रख सकती थीं।
इसके बावजूद मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड ने जमीन आईडीबीआई बैंक में बंधक रखी। वहीं मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड ने केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में जमीन गिरवी रख दी। बताया गया है कि इस संबंध में ऊर्जा विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई और न ही शासन को इसकी जानकारी दी गई।
नोटिस का भी नहीं दिया जवाब
कंपनियों की ओर से अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किए जाने के बाद शासन ने सख्त रुख अपनाया। अनुबंध की शर्त 4(6) के तहत 25 मई 2026 को दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनियों को 15 दिन के भीतर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था।
नोटिस कंपनियों के पंजीकृत पते और ईमेल के माध्यम से भेजे गए थे और उनके प्राप्त होने की पुष्टि भी हुई। इसके बावजूद तय समय सीमा के भीतर दोनों कंपनियों की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
सरकार ने रद्द किया आवंटन
कंपनियों द्वारा पावर प्रोजेक्ट शुरू नहीं करने, जमीन को बिना अनुमति बैंकों में गिरवी रखने और नोटिस का जवाब नहीं देने के मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने अब अंतिम कार्रवाई की है।
25 अगस्त 2026 को अपर मुख्य सचिव डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अंतिम आदेश जारी किया। राज्यपाल की अनुमति के बाद आदेश में करीब 944.029 हेक्टेयर जमीन को ऊर्जा विभाग में वापस निहित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही कानपुर देहात के जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि राजस्व अभिलेखों यानी खतौनी में दोनों कंपनियों के नाम हटाकर पूरी जमीन को उत्तर प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज कराने की नियमानुसार कार्रवाई तत्काल सुनिश्चित की जाए।
सरकार की इस कार्रवाई को जमीन के दुरुपयोग और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के मामलों में सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
