सुप्रीम कोर्ट में मैरिटल रेप से जुड़े मामले पर सुनवाई टल गई है. वकीलों ने इस मामले में जवाब दाख़िल करने के लिए समय मांग लिया है, उसके बाद इस मामले की सुनवाई टाल दी गई है.
अब चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल में इस मामले की सुनवाई नहीं हो पाएगी.
सुप्रीम कोर्ट में वकीलों ने अनुरोध किया कि इस मामले को बाद में उठाया जाए, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ नवंबर के पहले सप्ताह में रिटायर हो रहे हैं.
बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी.
इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं.
सुनवाई के पहले दिन वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी और कॉलिन गोंसाल्वेस ने बहस की थी और अपना पक्ष रखा था.
दोनों वकीलों का कहना है कि मैरिटल रेप को भी क़ानूनी तौर पर बलात्कार मानना चाहिए.
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं को एक और दिन या बहस की आवश्यकता होगी, जबकि जवाब दाख़िल करने वालों को इसके लिए दो दिन से ज़्यादा की ज़रूरत होगी.
बुधवार को जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “हमारा विचार है कि निकट भविष्य में इस मामले की सुनवाई समाप्त करना संभव नहीं होगा. जब तक हम इस सप्ताह तक सुनवाई पूरी नहीं कर लेते, इसपर कोई फ़ैसला देना संभव नहीं होगा.”
उन्होंने मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया.
वरिष्ठ वकील करुणा नंदी ने कहा कि ‘अगर लोग सहयोग करें और अनुशासित रहें तो यह मामला शुक्रवार शाम तक निश्चित रूप से खत्म हो सकता है.
हालांकि पीठ ने कहा कि यह संभव नहीं होगा और उसे सभी की दलीलें सुननी होंगी.
