बिहार। बिहार सरकार नाबालिगों के स्क्रीन टाइम बढ़ने और सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने के दुष्प्रभावों पर नियंत्रण के लिए एक नीति तैयार कर रही है। यह जानकारी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार (23 फरवरी, 2026) को विधानसभा में दी।
नीति की तैयारी और विशेषज्ञ रिपोर्ट
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस विषय में बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सम्राट चौधरी ने बताया, “नाबालिगों में ऑनलाइन गेमिंग और लंबे स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना गंभीर चिंता का विषय है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाकर नीति तैयार की जाएगी।”
जदयू विधायक ने बताया ‘अदृश्य महामारी’
जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने कहा कि यह स्थिति बिहार के भविष्य के लिए अदृश्य महामारी के समान है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग ने बच्चों का ध्यान आकर्षक खिलौनों और किताबों से हटा दिया है।विधायक ने चेतावनी दी कि डोपामाइन के प्रभाव से मानसिक नियंत्रण प्रभावित हो रहा है, जिससे बच्चों में व्यवहारगत बदलाव और एकाग्रता की कमी देखी जा रही है।
सुझाव: डिजिटल हाइजीन और परामर्श केंद्र
समृद्ध वर्मा ने सरकार से सुझाव दिया कि:
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सभी सरकारी स्कूलों में ‘डिजिटल हाइजीन’ को अनिवार्य पाठ के रूप में शामिल किया जाए।
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प्रत्येक जिला अस्पताल में एडिक्शन काउंसलिंग सेंटर (लत परामर्श केंद्र) स्थापित किए जाएं।
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ग्रामीण माताओं को स्क्रीन टाइम प्रबंधन के बारे में जागरूक करने के लिए जीविका दीदी नेटवर्क का उपयोग किया जाए।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री का बयान
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा, “विभाग ने निम्हांस से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद इस विषय पर निश्चित रूप से नीति बनाई जाएगी।”
