ईरान से जुड़े बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते व्यवधान को लेकर अमेरिकी तेल कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन को गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की दिग्गज ऊर्जा कंपनियों एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स के शीर्ष अधिकारियों ने व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता पर चिंता जताई।
तेल कंपनियों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित रहती है, तो इसका असर केवल कच्चे तेल की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।
एक्सॉन मोबिल के सीईओ डैरेन वुड्स की चेतावनी
कहा कि यदि बाजार में सट्टेबाजों की गतिविधि बढ़ती है, तो तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से कहीं अधिक ऊपर जा सकती हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक बाजार में रिफाइंड उत्पादों की कमी पैदा होने का खतरा है।
वहीं शेवरॉन के सीईओ माइक वर्थ और कोनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने भी इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि अगर संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर भारी दबाव बन सकता है।
अमेरिका में घरेलू तेल उत्पादन
उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका में घरेलू तेल उत्पादन बढ़ाने की क्षमता सीमित है और इससे होर्मुज मार्ग से गुजरने वाली करीब 90 लाख से 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल आपूर्ति की भरपाई संभव नहीं हो पाएगी।इस बीच अमेरिकी बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। बुधवार को लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने वाला कच्चा तेल शुक्रवार तक बढ़कर करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
डोनाल्ड ट्रंप उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए करीब सात देशों से युद्धपोत तैनात करने की अपील की है। ट्रंप का कहना है कि चीन जैसे देश इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले तेल पर अधिक निर्भर हैं, इसलिए उन्हें भी इसकी सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।हालांकि अभी तक किसी भी देश ने इस मिशन में शामिल होने को लेकर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई है। वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
