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होटल आरिफ कैसल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में “अश्वमेध धर्म ध्वजा यात्रा” की घोषणा

होटल आरिफ कैसल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में “अश्वमेध धर्म ध्वजा यात्रा” के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम में संतों, श्रद्धालुओं और युवाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। इस यात्रा का उद्देश्य धार्मिक जागृति, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्र निर्माण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना बताया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इस अभियान को सनातन संस्कृति और युवा चेतना से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश

शिवाश्री ऋतु ने कहा कि इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनना उनके लिए भगवान शिव का आशीर्वाद है। उन्होंने इसे “हरिहर स्वरूप” बताते हुए कहा कि यह यात्रा सनातन एकता का संदेश देती है, जिसमें प्रभु श्रीराम की विजय में महादेव के आशीर्वाद की भावना निहित है।

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए अमरजीत मिश्रा ने कहा कि उनका जीवन प्रभु श्रीराम को समर्पित है। वहीं वेद प्रकाश ने इसे अपना पहला राष्ट्रीय आध्यात्मिक अभियान बताते हुए कहा कि यह समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक चेतना का प्रसार करेगा।

संतों का मार्गदर्शन

अयोध्या से पहुंचे संत जन्मेजय शरण और आचार्य डॉ. संतोष ने सनातन संस्कृति और युवा चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया। संत जन्मेजय शरण ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण व्यवस्था है।

उन्होंने बताया कि यात्रा का शुभारंभ 20 अक्टूबर, विजयदशमी के दिन किया जाएगा। यह लगभग 11,800 किलोमीटर लंबी होगी और चार चरणों में पूरी की जाएगी। यात्रा पैदल, वाहन और ट्रेन के माध्यम से संपन्न होगी।

यात्रा का रूट (चार चरण)

  • प्रथम चरण: दिल्ली → मथुरा → आगरा → ग्वालियर → उज्जैन → मुंबई → अहमदाबाद → जयपुर → पुणे → दिल्ली
  • द्वितीय चरण: दिल्ली → अमृतसर → जम्मू → चंडीगढ़ → हरिद्वार → देहरादून → मेरठ → दिल्ली
  • तृतीय चरण: दिल्ली → अयोध्या → पटना → कोलकाता → रांची → वाराणसी → लखनऊ → कानपुर → नोएडा → दिल्ली
  • चतुर्थ चरण: ट्रेन मार्ग से दिल्ली → रामेश्वरम → पुणे → दिल्ली

इन सभी चरणों में निर्धारित स्थानों पर अश्वमेध धर्म यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा।

उद्देश्य और संदेश

संतों ने कहा कि यह यात्रा युवाओं को प्रभु श्रीराम के आदर्शों—त्याग, सेवा और मर्यादा—से जोड़ने का प्रयास है। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगी।

अन्य वक्तव्य

चक्रवर्तुला रमणाचा ने इसे अपने परिवार की धर्म सेवा परंपरा का विस्तार बताया। फिल्म निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह ने कहा कि यह अभियान युवाओं को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने में मदद करेगा। थाईलैंड से विनोद हांडा ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह महाअभियान वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति के प्रसार में योगदान देगा।आचार्य डॉ. संतोष ने श्रद्धालुओं और युवाओं से धर्म एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।अमरजीत मिश्रा ने एक बार फिर राम मंदिर आंदोलन की स्मृतियों को साझा करते हुए इसे अपने जीवन का कर्तव्य बताया।

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