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केजीएमयू के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद को पद्मश्री, टीबी नियंत्रण और श्वसन चिकित्सा में योगदान का मिला सम्मान

King George’s Medical University के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष Dr. Rajendra Prasad को सोमवार को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. प्रसाद ने कहा कि यह उनके 45 वर्षों से अधिक समय तक श्वसन चिकित्सा, तपेदिक नियंत्रण और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का सम्मान है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता, शिक्षकों और विद्यार्थियों को दिया।

बस्ती से केजीएमयू तक का प्रेरणादायक सफर

17 फरवरी 1950 को Basti जिले के मुंडरेवा में जन्मे डॉ. राजेंद्र प्रसाद के पिता गोपी चंद वस्त्र व्यापारी थे। उनका सपना था कि उनका बेटा डॉक्टर बने। बचपन में स्वास्थ्य समस्याओं और लगातार बीमारी के बावजूद डॉ. प्रसाद ने पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

उनकी प्रतिभा को देखते हुए पिता ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए Christian College भेजा। बाद में उन्होंने 1970 में King George Medical College से एमबीबीएस किया और फिर टीबी एवं छाती रोग में डिप्लोमा तथा एमडी की डिग्री हासिल की।

टीबी नियंत्रण में निभाई अहम भूमिका

1976 में योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया के दौरान डॉ. प्रसाद शीर्ष 10 छात्रों में शामिल रहे। उन्होंने तपेदिक (टीबी) के क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र चुना और इसे नई दिशा देने का संकल्प लिया।

डॉ. प्रसाद ने मेडिकल कॉलेजों में भारत के पहले प्रत्यक्ष अवलोकन उपचार लघु पाठ्यक्रम (DOTS) केंद्रों में से एक की स्थापना की। उन्होंने उत्तर प्रदेश की पहली वीडियो ब्रोंकोस्कोपी और पहली स्लीप लैब स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

पांच लाख मरीजों का इलाज, 325 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने करियर में पांच लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया। उन्होंने हजारों डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया और 12 चिकित्सा पुस्तकों का लेखन किया। उनके 325 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने देशभर के 700 मेडिकल कॉलेजों को टीबी नियंत्रण अभियान से जोड़ने में अहम योगदान दिया।

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