आगामी मानसून और संभावित बाढ़ की चुनौती को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी, प्रयागराज और सिद्धार्थनगर समेत कई संवेदनशील जिलों में युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी के किनारे बसे सैकड़ों गांव हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आते हैं, जिससे करीब तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित होते हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से ही तैयारियों का खाका तैयार कर लिया है। जिलाधिकारी के निर्देशन में अब तक तीन बार स्टीयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित की जा चुकी है, जिसमें बाढ़ प्रबंधन की प्री-प्लानिंग पर विशेष जोर दिया गया है।
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानंद गुप्ता ने बताया कि बाढ़ प्रबंधन को तीन चरणों—प्री प्लानिंग, ड्यूरिंग प्लानिंग और आफ्टर प्लानिंग—में विभाजित किया गया है। प्री-प्लानिंग के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, राहत चौकियों की स्थापना, पशुओं के लिए चारे और सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था तथा प्रभावित लोगों के पुनर्वास की तैयारी की जा रही है।
वाराणसी में हरहुआ से सामने घाट तक का क्षेत्र बाढ़ के दौरान सबसे अधिक प्रभावित माना जाता है। सामने घाट, सरैया, चौबेपुर, कोनिया, जैतपुरा और मारुति नगर कॉलोनी जैसे इलाकों में कई दिनों तक पानी भरा रहता है। गंगा नदी का चेतावनी स्तर 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.32 मीटर निर्धारित है, जबकि वर्ष 1978 में 73.63 मीटर का सर्वोच्च जलस्तर दर्ज किया गया था।
बाढ़ जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) द्वारा मॉक अभ्यास भी किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान नदी में डूबने, नाव पलटने और अचानक आई बाढ़ में फंसे लोगों के बचाव जैसे परिदृश्यों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि इसका उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है।
वहीं, प्रयागराज में भी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से व्यापक मॉक एक्सरसाइज आयोजित की गई। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस अभ्यास में बाढ़, नाव दुर्घटना, नदी कटान और अग्निकांड जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों का परीक्षण किया गया।
सिद्धार्थनगर जिले में राप्ती नदी तट पर राज्य स्तरीय बाढ़ राहत एवं बचाव मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें एसडीआरएफ, प्रशासन, पुलिस, नगर पालिका और आपदा मित्रों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कहा कि इस तरह के अभ्यास जनहानि को कम करने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ की स्थिति में अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
