उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में कार्यरत 3,346 पदों को स्थायी करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक अनुसंधान और अकादमिक गतिविधियों को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के 70 जनपदों में संचालित डायट संस्थानों के विभिन्न शैक्षणिक, तकनीकी और प्रशासनिक पद अब स्थायी स्वरूप में कार्य करेंगे। लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था के तहत संचालित इन पदों को स्थायित्व मिलने से संस्थानों की कार्यक्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आएगा।
प्रदेश सरकार लगातार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर कार्य कर रही है। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा, निपुण भारत मिशन, बाल वाटिका और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों के साथ अब शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को भी मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रशिक्षित और दक्ष शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
स्थायी किए जाने वाले पदों में प्राचार्य, उप प्राचार्य, वरिष्ठ प्रवक्ता, प्रवक्ता, सांख्यिकीविद, कार्यानुभव शिक्षक, तकनीकी सहायक, कार्यालय अधीक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, लेखाकार, आशुलिपिक, लिपिक, प्रयोगशाला सहायक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। कुल 3,346 पदों के स्थायीकरण से डायट संस्थानों को स्थायी मानव संसाधन ढांचा प्राप्त होगा।
शासनादेश के अनुसार इनमें से अधिकांश पद वर्ष 1989, 1990, 1995 और 2004 में सृजित किए गए थे और वर्षों से अस्थायी व्यवस्था के तहत संचालित हो रहे थे। शिक्षा व्यवस्था में उनकी निरंतर आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने उन्हें स्थायी स्वरूप देने का निर्णय लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नई शिक्षा नीति-2020, निपुण भारत मिशन, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) कार्यक्रम तथा शिक्षक क्षमता संवर्धन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा। इससे शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को नया आधार मिलने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।
