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MDM रसोइयों की सेवानिवृत्ति उम्र 62 साल हो सकती है, सेवा नियमावली बनाने की तैयारी

लखनऊ। प्रदेश के बेसिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) तैयार करने वाले रसोइयों को जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार उनकी सेवा नियमावली तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जिसके तहत रसोइयों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव है। नियमावली लागू होने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया, अवकाश और अन्य सेवा संबंधी प्रावधान भी तय किए जाएंगे।

मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्राथमिक विद्यालयों में पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। वर्तमान में प्रदेश के करीब 1.41 लाख विद्यालयों में 1.52 करोड़ बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था को संचालित करने के लिए लगभग 3.63 लाख रसोइये कार्यरत हैं।

वर्तमान में रसोइयों को प्रतिमाह 2,000 रुपये मानदेय दिया जाता है, लेकिन उनकी सेवा शर्तें निर्धारित नहीं हैं। ग्राम समितियों के माध्यम से उनका चयन किया जाता है और कई स्थानों पर 70 से 75 वर्ष तक की आयु के रसोइये भी कार्यरत हैं। वहीं, किसी स्पष्ट नियम के अभाव में ग्राम समितियां उन्हें कभी भी कार्य से हटा सकती हैं।

हाल ही में रसोइयों के प्रदर्शन और मांगों के बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग तथा शासन स्तर पर कई बैठकें हुईं। इन बैठकों में रसोइयों की सेवा शर्तें निर्धारित करने पर सहमति बनी। इसके बाद प्राधिकरण को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

यदि सेवा नियमावली लागू होती है तो रसोइयों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु तय होने के साथ-साथ अवकाश संबंधी सुविधाएं भी सुनिश्चित हो सकेंगी। वर्तमान में उन्हें मातृत्व अवकाश, चाइल्ड केयर लीव या अन्य किसी प्रकार की छुट्टी का लाभ नहीं मिलता है। नई व्यवस्था में इन सुविधाओं को शामिल किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।

इसके अलावा अन्य संविदा कर्मचारियों की तरह रसोइयों को 10 माह के बजाय 11 माह का मानदेय देने के प्रस्ताव पर भी मंथन चल रहा है। नई सेवा नियमावली लागू होने से रसोइयों को अधिक सुरक्षा और स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

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