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विश्व मंच पर छाया भारत का योग, न्यूयॉर्क से शंघाई तक दिखा उत्साह

12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में भारत की प्राचीन योग परंपरा की गूंज सुनाई दी। ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ थीम के साथ आयोजित इस वैश्विक उत्सव में लाखों लोगों ने भाग लेकर योग को स्वस्थ और संतुलित जीवन का आधार बताया।

विदेश मंत्रालय और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के संयुक्त प्रयासों से दुनिया के विभिन्न देशों में स्थित 210 से अधिक भारतीय मिशनों और दूतावासों ने करीब 2,500 सार्वजनिक एवं ऐतिहासिक स्थलों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए। इन आयोजनों में स्थानीय नागरिकों, प्रवासी भारतीयों और विभिन्न समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा की उपस्थिति में वॉशिंगटन डीसी स्थित लिंकन मेमोरियल पर भव्य योग सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की जानकारी के लिए विशेष आयुर्वेद कॉर्नर भी स्थापित किए गए।

वहीं न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वायर में भारतीय महावाणिज्य दूतावास के सहयोग से विशाल योग कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस विशेष सत्र का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग गुरु एच. आर. नागेंद्र ने किया। योगाभ्यास के साथ भारत की समग्र स्वास्थ्य परंपरा को भी प्रदर्शित किया गया।

चीन के शंघाई स्थित बंड फाइनेंस सेंटर में भारतीय महावाणिज्य दूतावास की ओर से बड़े पैमाने पर योग सत्र आयोजित किया गया। कनाडा के टोरंटो में ओंटारियो विधानसभा भवन के सामने सामूहिक योगाभ्यास हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों और स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लिया।

ब्रिटेन के बर्मिंघम, जर्मनी, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी देशों में भी खुले मैदानों और सार्वजनिक स्थलों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के ओलंपिक पार्क में आयोजित योग उत्सव में दिव्यांगजनों के लिए विशेष सत्र आकर्षण का केंद्र रहा। यहां भारतीय व्यंजनों और पारंपरिक वस्त्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं—अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश—में उपलब्ध कॉमन योग प्रोटोकॉल के माध्यम से दुनिया के विभिन्न देशों में लोगों ने एक साथ योग और प्राणायाम का अभ्यास किया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर वैश्विक स्तर पर मिली व्यापक भागीदारी यह दर्शाती है कि योग अब केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि दुनिया भर में स्वास्थ्य, संतुलन और बेहतर जीवनशैली का प्रतीक बन चुका है। विदेशों में बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि ‘भारत का योग’ अब एक वैश्विक आरोग्य आंदोलन का रूप ले चुका है।

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