अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब राजधानी लखनऊ तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियां आरोपियों के साथ-साथ उनके परिवार के 54 सदस्यों की चल और अचल संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही हैं। इसके लिए नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), आवास विकास परिषद, स्टाम्प और राजस्व विभाग से पिछले दो वर्षों में खरीदी गई जमीन, मकान, फ्लैट, दुकान समेत अन्य संपत्तियों की जानकारी मांगी गई है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) प्रदीप वर्मा ने संबंधित विभागों, सभी उपजिलाधिकारियों और सहायक महानिरीक्षक स्टाम्प प्रथम एवं द्वितीय को पत्र भेजकर जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से शहरी क्षेत्रों में खरीदी गई संपत्तियों के साथ ग्रामीण इलाकों में खरीदी गई कृषि भूमि का भी पूरा विवरण मांगा गया है।
चोरी के बाद खरीदी गई संपत्तियों पर जांच एजेंसियों की नजर
जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कहीं आरोपियों या उनके परिवार के सदस्यों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी की घटना के बाद अचानक बड़ी संख्या में संपत्तियां तो नहीं खरीदीं। यदि किसी संपत्ति की खरीद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई या उसके लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत पर सवाल उठते हैं, तो उसकी अलग से जांच की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर आरोपियों की आय के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल होगी।
अयोध्या एसएसपी के पत्र के बाद शुरू हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ में संपत्तियों का रिकॉर्ड जुटाने की कार्रवाई अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर शुरू हुई है। पत्र मिलने के बाद लखनऊ प्रशासन ने संबंधित विभागों को रिकॉर्ड जुटाने के निर्देश दिए हैं। सभी विभागों से मिली जानकारी को एकत्र कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे आगे की जांच के लिए संबंधित एजेंसियों को भेजा जाएगा।
कई विभागों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
जांच के तहत नगर निगम से भवनों का रिकॉर्ड, एलडीए से आवंटन और रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी, आवास विकास परिषद से आवासीय संपत्तियों का विवरण, स्टाम्प विभाग से संपत्ति खरीद-फरोख्त के दस्तावेज और राजस्व विभाग से कृषि भूमि से संबंधित रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों से भी जानकारी मांगी जा सकती है।
