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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सियासत तेज, राजभर ने अखिलेश से पूछा- अगर यादव होते तो भी इस्तीफा मांगते?

प्रदेश में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। विपक्ष जहां इसे नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं की जीत बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश में जुटा है। उत्तर प्रदेश में अब कुर्मी बनाम यादव की सियासत को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।

प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि, “मित्र अखिलेश यादव जी, अगर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जाति कुर्मी की जगह यादव होती तो क्या आप उनका इस्तीफा मांगते या उनका बचाव करते? आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी।”

दरअसल, नीट समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के विरोध में युवाओं के आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रहा था। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी इस आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आई थीं। अब सत्ता पक्ष इस पूरे घटनाक्रम को जातीय समीकरणों से जोड़कर विपक्ष को घेरने की रणनीति बना रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए कुर्मी मतदाताओं को साधने की कोशिशें तेज हो सकती हैं। भाजपा और उसके सहयोगी दल यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि विपक्ष कुर्मी समाज के खिलाफ राजनीति कर रहा है।

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को कुर्मी समाज का अच्छा समर्थन मिला था। पार्टी के चुनाव चिन्ह पर कुर्मी बिरादरी के सात सांसद जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव तक कुर्मी वोट बैंक को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।

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