आज शाम सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में खगोल प्रेमियों को एक दुर्लभ और आकर्षक खगोलीय दृश्य देखने को मिलेगा। पश्चिमी क्षितिज पर शुक्र ग्रह, स्पाइका और रेगुलस लगभग एक ही दिशा में दिखाई देंगे, जिससे आकाश में मनमोहक संयोजन बनेगा। मौसम साफ रहने पर इस दृश्य को बिना किसी दूरबीन के भी आसानी से देखा जा सकेगा।
खगोलविदों के अनुसार यह संयोजन चित्रा (स्पाइका) और मघा (रेगुलस) तारे के बीच शुक्र ग्रह की उपस्थिति के कारण विशेष माना जा रहा है। यह घटना अंतरिक्ष विज्ञान में ग्रहों और तारों की प्रत्यक्ष स्थिति को समझने का भी बेहतरीन अवसर है।
क्या है स्पाइका और रेगुलस?
स्पाइका, जिसे खगोल विज्ञान में अल्फा वर्जिनिस कहा जाता है, कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है और पृथ्वी से करीब 250 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। वहीं रेगुलस, जिसे हिंदी में मघा तारा भी कहा जाता है, सिंह तारामंडल का प्रमुख तारा है और पृथ्वी से लगभग 79 प्रकाश वर्ष की दूरी पर मौजूद है।
कब और कैसे देखें यह नजारा?
खगोलविदों के मुताबिक सूर्यास्त के तुरंत बाद से शुरुआती शाम तक यह दृश्य सबसे स्पष्ट रहेगा। पश्चिम दिशा में खुले क्षितिज वाले स्थान से इसे आसानी से देखा जा सकेगा। शहर की तेज रोशनी और प्रकाश प्रदूषण से दूर रहने पर दृश्य और भी स्पष्ट दिखाई देगा। दूरबीन या बाइनोकुलर का इस्तेमाल करने पर शुक्र ग्रह और उसके आसपास मौजूद दोनों चमकीले तारों का नजारा और आकर्षक होगा।
कितनी देर तक दिखाई देगा दृश्य?
खगोलीय गणनाओं के अनुसार रेगुलस तारा शाम करीब 7:30 बजे तक दिखाई देगा। इसके बाद शुक्र ग्रह लगभग 8:45 बजे पश्चिमी क्षितिज के नीचे अस्त हो जाएगा, जबकि स्पाइका तारा रात करीब 10 बजे तक दिखाई देता रहेगा।
खगोलविद ने क्या कहा?
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आज शाम सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर शुक्र, स्पाइका और रेगुलस एक आकर्षक खगोलीय संयोजन बनाएंगे। उन्होंने कहा कि साफ मौसम और खुले आसमान की स्थिति में इस दृश्य को नंगी आंखों से देखा जा सकता है, जबकि दूरबीन या बाइनोकुलर से इसका सौंदर्य और अधिक स्पष्ट दिखाई देगा।
उन्होंने बताया कि शुक्र ग्रह इस समय पश्चिमी आकाश का सबसे चमकीला पिंड है और स्पाइका तथा रेगुलस के साथ इसकी स्थिति एक दुर्लभ दृश्य प्रस्तुत करेगी। खगोलीय दृष्टि से यह घटना ग्रहों और तारों की आभासी स्थिति को समझने का अच्छा अवसर है।
अमर पाल सिंह के अनुसार, ऐसे विशेष खगोलीय संयोजन विद्यार्थियों और आम लोगों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और रुचि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक अंतरिक्ष में ये तीनों पिंड एक-दूसरे से बहुत दूर स्थित हैं, लेकिन पृथ्वी से देखने पर एक ही दिशा में दिखाई देने के कारण यह आकर्षक दृश्य बनता है।
