नई दिल्ली। केंद्र सरकार के ऑनलाइन पब्लिक प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने देश के डिजिटल गवर्नेंस के सफर में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। 9 अगस्त को GeM अपनी सेवा के 10 वर्ष पूरे करने जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 7 अगस्त 2026 तक इस प्लेटफॉर्म के जरिए ₹20 लाख करोड़ से अधिक की संचयी खरीद पूरी हो चुकी है। इसके लिए अब तक 3.7 करोड़ से ज्यादा ऑर्डर दिए जा चुके हैं।
पारदर्शी सरकारी खरीद की दिशा में बड़ा बदलाव
GeM की शुरुआत 9 अगस्त 2016 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य सरकारी खरीद प्रक्रिया को तकनीक आधारित, पारदर्शी और अधिक कुशल बनाना था।
वित्त वर्ष 2016-17 में GeM का वार्षिक कारोबार (GMV) महज ₹422 करोड़ था। अब यह कारोबार कई गुना बढ़ चुका है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में ही GeM ने ₹1,47,888 करोड़ का कारोबार दर्ज किया है।
GeM के CEO मिहिर कुमार के अनुसार, प्लेटफॉर्म के विकास की रफ्तार उल्लेखनीय रही है। जहां GeM को शुरुआती ₹10 लाख करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने में आठ साल से अधिक समय लगा, वहीं अगले ₹10 लाख करोड़ का सफर दो साल से भी कम समय में पूरा कर लिया गया।
उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से सरकारी खरीद प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और वैल्यूएबल बनाया जाएगा।
छोटे उद्योगों और महिलाओं को मिला बढ़ावा
बीते 10 वर्षों में GeM पर विक्रेताओं और खरीदारों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। पंजीकृत विक्रेताओं की संख्या 3,339 से बढ़कर 25.45 लाख हो गई है। वहीं, सरकारी खरीदार संगठनों की संख्या 1,707 से बढ़कर 1.37 लाख पहुंच गई है।
GeM ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSEs) को सरकारी खरीद प्रक्रिया की मुख्यधारा से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई है। पोर्टल पर पंजीकृत MSEs की संख्या 2,424 से बढ़कर 12.25 लाख हो गई है।
इन छोटे उद्योगों ने अब तक ₹9.07 लाख करोड़ से अधिक के ऑर्डर पूरे किए हैं, जो GeM के कुल कारोबार का करीब 45.6 प्रतिशत है।
इसके अलावा, 2.24 लाख से अधिक महिला नेतृत्व वाले MSEs ने ₹99,147 करोड़ से ज्यादा के 50 लाख से अधिक ऑर्डर पूरे किए हैं। वहीं, 40 हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स को भी ₹65,633 करोड़ से अधिक के ऑर्डर मिले हैं।
IIT दिल्ली की स्टडी में बचत का दावा
IIT दिल्ली की ओर से वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच किए गए एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि GeM ने कम कीमतों और कुशल प्रक्रियाओं के जरिए सरकार को ₹86,571.69 करोड़ का प्रत्यक्ष मौद्रिक लाभ पहुंचाया है।
अध्ययन के मुताबिक, इसके अलावा देश को करीब ₹1,76,411.46 करोड़ की सामाजिक बचत भी हुई है।
रिपोर्ट में सामान्य तौर पर खरीदे जाने वाले 101 उत्पादों की कीमतों की तुलना अन्य प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से की गई। इसमें पाया गया कि 74.3 प्रतिशत उत्पाद GeM पर कम कीमतों में उपलब्ध थे। इससे सरकार को सीधे तौर पर 13.6 प्रतिशत की वित्तीय बचत हुई।
GeM के 10 वर्ष पूरे होने के साथ ही यह प्लेटफॉर्म सरकारी खरीद में पारदर्शिता, तकनीक और छोटे कारोबारियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभरा है।
