नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज करने वाले दीपांशु शौकीन ने अपनी जीत का पूरा श्रेय छात्रों को दिया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने उन पर भरोसा जताया और चुनाव के दौरान मजबूती से उनके साथ खड़े रहे।
मीडिया से बातचीत में दीपांशु शौकीन ने कहा कि छात्रों के समर्थन के बिना यह जीत संभव नहीं थी। उन्होंने छात्र समस्याओं के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। सत्य निकेतन में हुई घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रशासन में जिम्मेदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने की बात कही।
NSUI की हार पर क्या बोले दीपांशु?
NSUI के चुनावी प्रदर्शन पर दीपांशु शौकीन ने संगठन की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर जमीनी स्थिति को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाते तो चुनाव का परिणाम अलग हो सकता था। उनके मुताबिक छात्र उन्हीं उम्मीदवारों के साथ खड़े होते हैं, जो उनके बीच रहकर उनकी समस्याओं और मुद्दों को उठाते हैं।
उन्होंने कहा कि संगठन में चुनावी प्रबंधन और आंतरिक राजनीति को लेकर जिम्मेदार लोगों को बेहतर तालमेल के साथ काम करना चाहिए था। टिकट वितरण को लेकर भी उन्होंने स्पष्टता की कमी का दावा किया।
टिकट प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
दीपांशु शौकीन ने कहा कि चुनाव से पहले यह स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि कौन उम्मीदवार किस पद पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर शीर्ष स्तर तक उनकी दावेदारी पर विचार किया जाता तो उन्हें भी टिकट के लिए योग्य उम्मीदवार के तौर पर देखा जा सकता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से जुड़े फैसलों को लेकर आखिरी समय तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई और कई लोगों को अलग-अलग तरह के आश्वासन दिए गए।
कन्हैया कुमार पर भी साधा निशाना
दीपांशु शौकीन ने छात्र संगठन के चुनावी प्रबंधन को लेकर कन्हैया कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार नेताओं को जमीनी स्तर पर जाकर उम्मीदवारों की स्थिति और उनकी तैयारियों का आकलन करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि यदि नेतृत्व ने कैंपस में जाकर जमीनी स्थिति को समझा होता तो संगठन की रणनीति अलग हो सकती थी।
राहुल गांधी के छात्र अभियान का किया समर्थन
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लेकर दीपांशु शौकीन ने कहा कि छात्रों से जुड़ने वाली ऐसी पहलों को कैंपस स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों की समस्याएं और आवाज शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी के साथ अपनी मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। हालांकि, उन्होंने संगठन के निचले स्तर पर मौजूद लोगों और शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद में आने वाली बाधाओं की बात भी कही।
बोले- जिसके साथ छात्र, चुनाव में उसी का असर
दीपांशु शौकीन ने कहा कि DUSU चुनाव से उन्होंने सीखा कि छात्रों के बीच लगातार मौजूद रहना और उनसे संवाद करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जेन-जी के साथ जुड़ने के लिए केवल चुनाव के समय संपर्क करने के बजाय पूरे समय उनके बीच रहकर काम करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस चुनाव में कई नेताओं और लोगों ने उनका समर्थन किया, लेकिन उनकी जीत का सबसे बड़ा आधार छात्रों का भरोसा रहा।
