रिपोर्ट- प्रिया बाजपेयी शुक्ला
रायबरेली। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक अवध केसरी राणा बेनी माधव बक्श सिंह की वीरता और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए रायबरेली के सलोन में विकसित किया जा रहा भव्य स्मारक परिसर अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। सभागार, पुस्तकालय, गेस्ट हाउस, एम्फीथिएटर और आधुनिक लाइट एंड साउंड व्यवस्था से सुसज्जित यह परिसर जिले में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
पहले चरण का 95 प्रतिशत निर्माण पूरा
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, परियोजना के प्रथम चरण में राणा बेनी माधव बक्श सिंह की स्मृति में सभागार और पुस्तकालय का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इसके लिए 20.09 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है और निर्माण कार्य करीब 95 प्रतिशत पूरा हो गया है। भवन का मुख्य ढांचा तैयार है और अब पुट्टी, पेंट, फॉल्स सीलिंग, वॉल पैनलिंग और पोर्च समेत अंतिम फिनिशिंग का काम चल रहा है, जिसे इसी महीने पूरा किए जाने का लक्ष्य है।

दूसरे चरण में 65 प्रतिशत काम पूरा
परियोजना के दूसरे चरण के लिए 12 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस चरण का करीब 65 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। रिटेनिंग वॉल और बाउंड्री वॉल बनकर तैयार हैं। गेस्ट हाउस के भूतल की स्लैब और प्रथम तल की शटरिंग का काम भी पूरा हो गया है। वहीं फाउंडेशन, ईएसएस और फायर रूम का निर्माण पूरा किया जा चुका है। एम्फीथिएटर सहित अन्य संरचनाओं और फिनिशिंग का काम तेजी से जारी है।
लाइट एंड साउंड से जीवंत होगा इतिहास
स्मारक परिसर में आधुनिक लाइट एंड साउंड आधारित आंतरिक विकास भी किया जा रहा है। इसके लिए 4 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है और करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। प्रकाश और ध्वनि तकनीक के जरिए राणा बेनी माधव बक्श सिंह के शौर्य, संघर्ष और बलिदान को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का जीवंत अनुभव मिल सकेगा।

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छेड़ा था सशक्त संघर्ष
राणा बेनी माधव बक्श सिंह रायबरेली के जगतपुर स्थित शंकरपुर रियासत के शासक थे और 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ प्रमुख क्रांतिकारी नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने अवध के तालुकेदारों और जमींदारों को संगठित कर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया।
28 जून 1857 को बाराबंकी के नवाबगंज में उन्होंने अंग्रेजी सेना को पराजित किया। चिनहट के ऐतिहासिक युद्ध में भी उन्होंने वीरता का परिचय दिया। नवंबर 1858 में गोविंदपुर भीरा में करीब 10 हजार सैनिकों के साथ अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोलकर उन्होंने महत्वपूर्ण विजय हासिल की थी।

युवाओं को राष्ट्रभक्ति की देगा प्रेरणा
सलोन में विकसित किया जा रहा यह स्मारक परिसर राणा बेनी माधव बक्श सिंह की अमर विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। सभागार, पुस्तकालय, एम्फीथिएटर और लाइट एंड साउंड शो जैसी सुविधाओं से यह परिसर ऐतिहासिक जानकारी के साथ युवाओं को राष्ट्रभक्ति, साहस और बलिदान की प्रेरणा देगा।

सरकार का मानना है कि यह परियोजना रायबरेली को सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विरासत पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

