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लखनऊ : SGPGI को मेडिकल रिसर्च के लिए करीब 20 करोड़ की फंडिंग, 8 बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट मंजूर

न्यूज़ डेस्क ,लखनऊ

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) ने चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के तहत संस्थान को करीब 20 करोड़ रुपये की रिसर्च फंडिंग मिली है। इसके तहत SGPGI के 8 महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट्स का चयन किया गया है।

दो कैटेगरी में मिली रिसर्च फंडिंग

ICMR ने देश के शीर्ष NIRF-रैंक वाले मेडिकल संस्थानों के लिए ‘Restricted Call for Proposals’ और ‘Intermediate Category’ के तहत फंडिंग स्वीकृत की है।

NIRF कैटेगरी: SGPGI के पांच रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 11.2 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इंटरमीडिएट कैटेगरी: तीन अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के लिए संस्थान को 8.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंडिंग मिली है।

81 प्रस्तावों में से 8 प्रोजेक्ट्स का चयन

संस्थान के डीन प्रो. शालीन कुमार और रिसर्च फैकल्टी इंचार्ज प्रो. विनीता अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त 81 प्रस्तावों के कड़े मूल्यांकन के बाद SGPGI के 8 प्रोजेक्ट्स का अंतिम रूप से चयन किया गया। यह संस्थान की वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमता को दर्शाता है।

मरीजों के इलाज तक पहुंचेगी रिसर्च

संस्थान के निदेशक प्रो. राधा कृष्ण धीमन ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह SGPGI के मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम और विशेषज्ञों की प्रतिबद्धता का परिणाम है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को सीधे मरीजों के उपचार और देखभाल में इस्तेमाल करना यानी ट्रांसलेशनल रिसर्च को बढ़ावा देना है।

लिवर रोग पर होगा महत्वपूर्ण शोध

एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. रोहित सिन्हा MASLD से जुड़े शोध का नेतृत्व करेंगे। इसमें लिवर फाइब्रोसिस को रोकने वाले नए मॉलिक्यूलर पाथवे की जांच की जाएगी।

ब्रेन कैंसर के लिए पर्सनलाइज्ड रिसर्च

मॉलिक्यूलर मेडिसिन विभाग के डॉ. लोकेंद्र शर्मा ग्लियोब्लास्टोमा यानी ब्रेन कैंसर पर शोध करेंगे। मरीजों से प्राप्त ऑर्गेनॉइड्स की मदद से पर्सनलाइज्ड कैंसर रिसर्च पर काम किया जाएगा।

गर्भावस्था में एनीमिया के इलाज पर फोकस

मॉलिक्यूलर मेडिसिन विभाग के डॉ. आलोक कुमार प्रेग्नेंसी एनीमिया पर शोध करेंगे। इसमें हेपसिडिन आधारित सटीक उपचार की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा।

किडनी ट्रांसप्लांट मरीजों में संक्रमण की जल्द पहचान

माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. अतुल गर्ग किडनी ट्रांसप्लांट मरीजों में वायरल संक्रमण की जल्द पहचान के लिए NGS तकनीक के इस्तेमाल पर शोध करेंगे।

कैंसर इम्यूनोथेरेपी को लेकर नया अध्ययन

हेमेटोलॉजी विभाग के डॉ. कुलवंत सिंह कैंसर कोशिकाओं के थेरेपी से बचने की प्रक्रिया का अध्ययन करेंगे। इस शोध से कैंसर इम्यूनोथेरेपी को बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिल सकती है।

हेपेटाइटिस C के इलाज की अवधि घटाने की कोशिश

हेपेटोलॉजी विभाग के डॉ. अमित गोयल RESOLVE-C ट्रायल पर काम करेंगे। इसका उद्देश्य हेपेटाइटिस C के उपचार की अवधि को 24 सप्ताह से घटाकर 12 सप्ताह करने की संभावनाओं का अध्ययन करना है।

IgA नेफ्रोपैथी में नए बायोमार्कर की तलाश

नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. अतुल IgA नेफ्रोपैथी पर शोध करेंगे। इसमें बीमारी की पहचान और उपचार में मददगार नए बायोमार्कर खोजने पर जोर रहेगा।

NICU में नवजातों के लिए ऑटोमेटेड न्यूट्रिशन सिस्टम

नियोनेटोलॉजी विभाग की डॉ. कीर्ति नारंजे NICU के लिए ऑटोमेटेड TPN न्यूट्रिशन कंपाउंडिंग सिस्टम विकसित करने पर शोध करेंगी। इसका उद्देश्य नवजात शिशुओं के लिए पोषण प्रबंधन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना है।

SGPGI की रिसर्च क्षमता को मिलेगी मजबूती

करीब 20 करोड़ रुपये की यह फंडिंग SGPGI में अत्याधुनिक चिकित्सा अनुसंधान को नई गति देगी। कैंसर, लिवर, किडनी, गर्भावस्था और नवजात देखभाल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होने वाले इन शोधों से भविष्य में मरीजों के उपचार के नए विकल्प विकसित होने की उम्मीद है।

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