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हमीरपुर: मौदहा बांध के 6 फाटक फेल, मरम्मत पर उठे सवाल; सायरन बजता रहा, बहता रहा पानी

रिपोर्ट: अंकित पाण्डेय

हमीरपुर। बुंदेलखंड में पानी को बेहद कीमती माना जाता है, लेकिन हमीरपुर के मौदहा बांध में बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद होने का मामला सामने आया है। बांध के 6 फाटक बंद नहीं हो पा रहे हैं, जबकि पिछले दो वित्तीय वर्षों में फाटकों की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है।

बारिश के बाद बांध का जलस्तर बढ़ने पर फाटकों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए प्रोटोकॉल के तहत सायरन भी बजाया गया। बताया जा रहा है कि फाटक बंद कराने के लिए अधिशासी अभियंता कार्यालय से लेकर ऑपरेटर तक के कर्मचारियों को मौके पर बुलाया गया। मोटर से लेकर मैनुअल चेन-पुली तक का इस्तेमाल किया गया, लेकिन छह फाटक बंद नहीं हो सके।

घंटों की मशक्कत के बाद भी नहीं बंद हुए फाटक

सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों ने घंटों फाटकों को बंद करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके चलते बांध से बड़ी मात्रा में पानी लगातार बहता रहा।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मौदहा बांध हमीरपुर के साथ बांदा और महोबा के किसानों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत है। किसानों को आशंका है कि अभी बारिश के दौरान पानी इस तरह बहता रहा तो आने वाले रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी हो सकती है।

करोड़ों की मरम्मत के बाद छह फाटक कै

से हुए फेल?

फाटकों के एक साथ खराब होने से उनके रखरखाव और मरम्मत की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले दो वित्तीय वर्षों में बांध के रखरखाव, गेट की मरम्मत, ग्रीसिंग, पेंटिंग और मोटर रिपेयर के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि मरम्मत का काम ठीक से हुआ था तो छह फाटक एक साथ बंद होने में असमर्थ कैसे हो गए? ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य में खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए पिछले वर्षों के टेंडर, बिल और मेजरमेंट बुक (एमबी) की जांच कराने की मांग की है।

तकनीकी खामी की भी जताई जा रही आशंका

सिंचाई विभाग से जुड़े जानकारों के अनुसार फाटकों के संचालन में रोलर जाम होना, वायर रोप और चेन में जंग लगना या मोटर और गियर बॉक्स में खराबी जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि मौदहा बांध के छह फाटकों के फेल होने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की

ग्रामीणों और किसानों ने मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों में बांध की मरम्मत और रखरखाव पर हुए खर्च की जांच के साथ काम करने वाले ठेकेदार और भुगतान की भी पड़ताल होनी चाहिए।

फिलहाल मामले में सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बताया जा रहा है कि फाटकों को दुरुस्त करने के लिए दूसरे जिलों से तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाने की तैयारी की जा रही है।

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