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बदायूं में अवैध क्लीनिकों का आरोप, नाधा और इस्लामनगर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

रिपोर्ट – अजयपाल यादव

बदायूं। जिले के सहसवान तहसील क्षेत्र के नाधा और बिल्सी तहसील के इस्लामनगर में कथित झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में कई ऐसे क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जहां बिना जरूरी मेडिकल डिग्री और पंजीकरण के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

इलाके में जगह-जगह ऐसे बोर्ड लगे होने की बात सामने आई है, जिन पर 24 घंटे इमरजेंसी सेवा, महिला प्रसव केंद्र और ऑपरेशन की सुविधा जैसे दावे किए जाते हैं। आरोप है कि इन केंद्रों पर पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ के बिना मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

गलत इलाज से मौत के आरोप

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कथित झोलाछापों के गलत इंजेक्शन और इलाज के कारण कई मरीजों की हालत बिगड़ने के मामले सामने आए हैं। प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि किसी घटना के बाद संबंधित क्लीनिक संचालक कुछ समय के लिए अपना ठिकाना बंद कर देते हैं और बाद में दूसरे नाम से नया बोर्ड लगाकर दोबारा संचालन शुरू कर देते हैं।

सील के बावजूद दोबारा संचालन का आरोप

सबसे गंभीर सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि करीब 10 दिन पहले कुछ क्लीनिकों पर सील लगाने की कार्रवाई की गई थी। आरोप है कि कुछ ही दिनों बाद सील तोड़कर इन जगहों पर फिर से इलाज, ऑपरेशन और डिलीवरी शुरू कर दी गई।

यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो सवाल उठता है कि सील किए गए क्लीनिकों में दोबारा गतिविधियां कैसे शुरू हो गईं और निगरानी व्यवस्था पर जिम्मेदारी किसकी है?

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल

इलाके में कथित अवैध क्लीनिकों के संचालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर विभागीय मिलीभगत और अवैध वसूली के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा? अगर बिना जरूरी योग्यता और अनुमति के मरीजों का इलाज किया जा रहा है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कब तक कार्रवाई होगी?

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