रिपोर्ट- प्रिया बाजपेई शुक्ला
जन्माष्टमी के करीब 15 दिन बाद ब्रज में एक और महत्वपूर्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव राधा रानी के जन्मदिवस यानी राधाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। भक्त इस पर्व को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तरह ही श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। इस दिन बरसाना समेत ब्रज के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं। इस साल राधाष्टमी 19 सितंबर को मनाई जाएगी।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन राधा रानी का जन्म हुआ था। राधाष्टमी पर मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। वहीं, घरों में भी लोग विधि-विधान से राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं।
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राधा रानी को क्यों चढ़ाया जाता है सोलह श्रृंगार?
राधाष्टमी की पूजा में राधा रानी को सोलह श्रृंगार अर्पित करने की परंपरा विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने राधा रानी को सोलह श्रृंगार से सजाया था। इसी परंपरा के चलते भक्त राधाष्टमी के दिन किशोरी जी को सोलह श्रृंगार अर्पित करते हैं।
मान्यता है कि राधा रानी को सोलह श्रृंगार अर्पित करने से भक्तों को राधा-कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। सुहागिन महिलाएं यदि राधा रानी को सोलह श्रृंगार चढ़ाकर पूजा करती हैं, तो उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।
क्या-क्या होता है राधा रानी का सोलह श्रृंगार?
राधा रानी के सोलह श्रृंगार में शामिल प्रत्येक वस्तु का धार्मिक और सांकेतिक महत्व माना जाता है।
- बिंदी: एकाग्रता और सौंदर्य का प्रतीक मानी जाती है।
- सिंदूर: सुहाग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
- मांग टीका: वैवाहिक जीवन में प्रेम और मिलन का प्रतीक माना जाता है।
- काजल: सौंदर्य के साथ बुरी नजर से रक्षा से जुड़ा माना जाता है।
- नथ: स्त्री सौंदर्य और स्त्रीत्व का प्रतीक मानी जाती है।
- कर्ण-फूल: सौंदर्य और श्रृंगार का महत्वपूर्ण आभूषण माना जाता है।
- मंगलसूत्र: प्रेम, निष्ठा और पति की दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है।
- मेहंदी: सुहाग और शुभता से जुड़ी मानी जाती है।
- चूड़ियां: सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं।
- बाजूबंद: सौंदर्य और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
- अंगूठी: एकता और संबंध का प्रतीक मानी जाती है।
- कमरबंद: पारंपरिक श्रृंगार का हिस्सा माना जाता है।
- पायल: इसकी रुनझुन को सकारात्मकता से जोड़ा जाता है।
- बिछिया: पारंपरिक रूप से सुहाग का प्रतीक मानी जाती है।
- आलता: शुभता और सुहाग से जुड़ी सामग्री मानी जाती है।
- साड़ी या लहंगा: राधा रानी को सुंदर पारंपरिक पोशाक अर्पित की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधाष्टमी पर राधा रानी को सोलह श्रृंगार अर्पित करना उनकी कृपा पाने का एक विशेष माध्यम माना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन स्वयं सोलह श्रृंगार कर राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौभाग्य बना रहता है। वहीं, कुंवारी कन्याओं द्वारा राधा रानी की पूजा करने से उन्हें अच्छे जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलने की भी मान्यता है।
