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लखनऊ में स्वामी प्रसाद मौर्य को पुलिस ने रोका, डीजीपी को ज्ञापन देने जा रहे थे

रिपोर्ट – प्रिया बाजपेयी शुक्ला

अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य को गुरुवार को लखनऊ में पुलिस ने उस समय रोक दिया, जब वह प्रदेश में कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर डीजीपी को ज्ञापन देने पुलिस मुख्यालय जा रहे थे। पार्टी के मुताबिक, मौर्य सुबह करीब 11 बजे गोमतीनगर स्थित पार्टी कार्यालय से पुलिस मुख्यालय के लिए निकले थे, लेकिन कार्यालय के पास ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। घटना की स्वतंत्र रिपोर्ट में भी पुलिस द्वारा उन्हें रोके जाने की पुष्टि हुई है।

आठ हत्या और हमले के मामलों का ज्ञापन

स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से दिए जाने वाले ज्ञापन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से जुड़े आठ हत्या और हमले के मामलों का उल्लेख किया गया है। पार्टी का आरोप है कि इन मामलों में नामजद कुछ आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। ज्ञापन के जरिए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।

ज्ञापन में अयोध्या के कंदैला में श्रीराम लगन मौर्य हत्याकांड, गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड, कासगंज में पवन कोरी हत्याकांड, प्रतापगढ़ में अर्जुन गौतम हत्याकांड और बदायूं में राजेश कोरी हत्याकांड का जिक्र किया गया है।

इसके अलावा सुल्तानपुर में मंगल कोरी और उनके परिवार पर हमले, प्रतापगढ़ में सौरभ विश्वकर्मा हत्याकांड तथा सुल्तानपुर के अखंडनगर में राजन पर हुए जानलेवा हमले को भी ज्ञापन में शामिल किया गया है।

पीड़ित परिवारों को न्याय और सुरक्षा की मांग

अपनी जनता पार्टी ने इन मामलों में नामजद आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस कार्रवाई तेज की जाए और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

ज्ञापन में पीड़ित परिवारों को न्याय के साथ सुरक्षा उपलब्ध कराने और पुलिस कार्रवाई की निगरानी कर मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई है।

‘डीजीपी कार्यालय में ज्ञापन देना था तो लखनऊ पुलिस कैसे ले सकती है?’

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह पूरे प्रदेश के पीड़ित परिवारों की समस्याएं डीजीपी के सामने रखने के लिए पुलिस मुख्यालय जा रहे थे। ऐसे में लखनऊ पुलिस उनका ज्ञापन किस अधिकार से ले रही है।

मौर्य ने दावा किया कि उनके पुलिस मुख्यालय जाने की सूचना करीब पांच दिन पहले ही डीजीपी कार्यालय को दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले ही बताया गया था कि वह विभिन्न मामलों में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाने के लिए डीजीपी से मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में एफआईआर दर्ज हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मौर्य ने अयोध्या, गोंडा, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और वाराणसी समेत अलग-अलग जिलों से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

मौर्य ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से यह भी पूछा कि क्या उन्हें डीजीपी कार्यालय की ओर से ज्ञापन लेने के लिए अधिकृत किया गया है। उनका कहना था कि यदि ज्ञापन लिया जाना था तो डीजीपी कार्यालय से किसी अधिकृत अधिकारी को मौके पर भेजा जाना चाहिए था।

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