रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि जारी की।
लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने चालू वित्त वर्ष में कक्षा 9-10 और उच्च कक्षाओं में पढ़ने वाले 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 148 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि हस्तांतरित की। इस दौरान 11 विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री ने मंच पर छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।
छात्रवृत्ति का पैसा पढ़ाई पर खर्च करने की सलाह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग शिक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस पैसे को खान-पान या अन्य गैर-जरूरी चीजों पर खर्च करने के बजाय अच्छी पाठ्य पुस्तकें और रेफरेंस बुक खरीदने में लगाया जाए। विद्यार्थियों को महापुरुषों की आत्मकथाएं और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़नी चाहिए तथा अपनी पुस्तकें एकत्र कर बुक बैंक तैयार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित न हो। उन्होंने समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति का लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि पहले छात्रवृत्ति वितरण में बिचौलियों और सरकारी व्यवस्था की खामियों के कारण कई विद्यार्थी लाभ से वंचित रह जाते थे। अब आधार आधारित व्यवस्था और सीधे बैंक खातों में भुगतान के माध्यम से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
चार लाख वंचित विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति देने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष विभिन्न कारणों से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के करीब चार लाख विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह गए थे। अब पोर्टल की व्यवस्था में सुधार कर इन विद्यार्थियों को भी लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि छात्रवृत्ति के लिए पात्र किसी भी विद्यार्थी का नाम छूटना नहीं चाहिए।
पिछले वर्ष 69 लाख विद्यार्थियों को मिली छात्रवृत्ति
योगी आदित्यनाथ के अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश में करीब 69 लाख विद्यार्थियों को लगभग 6,200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दी गई। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में चार करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिल चुका है।
वर्तमान चरण में विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति का विवरण इस प्रकार है:
– अन्य पिछड़ा वर्ग: 2,23,615 विद्यार्थी
– अनुसूचित जाति:1,59,959 विद्यार्थी
– सामान्य वर्ग: 38,084 विद्यार्थी
-अल्पसंख्यक वर्ग: 38,901 विद्यार्थी
पिछली सरकार की छात्रवृत्ति व्यवस्था पर उठाए सवाल
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की छात्रवृत्ति व्यवस्था को लेकर तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2016-17 में एससी-एसटी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति नहीं भेजी गई थी। योगी के मुताबिक, वर्ष 2017 में उनकी सरकार बनने के बाद 2016-17 और 2017-18 की छात्रवृत्ति एक साथ भेजी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति पर लगभग 2,900 करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे, जबकि अब यह राशि बढ़कर करीब 6,200 करोड़ रुपये हो गई है।
दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने का लक्ष्य, 50 हजार छात्राओं को स्कूटी
मुख्यमंत्री ने युवाओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने की दिशा में काम किया जा रहा है और करीब 60 लाख युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं।
इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अगले महीने 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके माध्यम से युवाओं को जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता मिल रही है।
11 विद्यार्थियों को मंच पर मिले प्रमाणपत्र
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी है।
इस अवसर पर रणवीर वर्मा, मिली, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अनन्या अवस्थी, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, अभिषेक यादव, बुशरा, साइमा और अल कैफ को मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र प्रदान किए।
सरकार की ओर से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तक पहुंच बनाने में सहायता देने पर जोर दिया जा रहा है।
