रिपोर्ट – प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जा रही है। प्रदेश के 26 देवी मंदिरों में मिशन शक्ति के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं, प्रमुख शक्तिपीठों के साथ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मंदिरों को भी पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना भी है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को लखनऊ के चौक स्थित बड़ी काली मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने नवरात्रि विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का शुभारंभ किया। मंत्री ने बताया कि बड़ी काली मंदिर के पर्यटन विकास के लिए सरकार ने 227.83 लाख रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की है।
83 करोड़ रुपये से 22 परियोजनाओं पर काम
प्रदेश में वर्ष 2017 से देवी मंदिरों के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत 19 जिलों के 20 देवी स्थलों पर लगभग 83 करोड़ रुपये की लागत से 22 प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के जरिए मंदिर परिसरों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, सौंदर्यीकरण और धार्मिक विरासत को नई पहचान देने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के शक्तिपीठ पर्यटन सर्किट में सहारनपुर का मां शाकुंभरी देवी मंदिर, नैमिषारण्य का मां ललिता देवी मंदिर, बलरामपुर का देवीपाटन मंदिर, मिर्जापुर का मां विंध्यवासिनी मंदिर और वाराणसी का मां विशालाक्षी देवी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं।
प्रमुख शक्तिपीठों पर बढ़ेंगी सुविधाएं
सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ में करीब 39 करोड़ रुपये की लागत से तीन परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें पर्यटक विश्राम गृह, ओपन एयर थिएटर और पैदल मार्ग को बेहतर बनाने सहित अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी मंदिर के विकास के लिए 15.23 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की गई है। वहीं, लखनऊ के मां चंद्रिका देवी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण पर 6.30 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
इसके अलावा भदोही के श्री सीता समाहित स्थल के पर्यटन विकास के लिए 3.52 करोड़ रुपये, बलरामपुर के देवीपाटन मंदिर में 3.29 करोड़ रुपये और प्रयागराज स्थित अलोपी देवी शक्तिपीठ में फसाड लाइटिंग के लिए 1.67 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों से मंदिरों की सुंदरता बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं की यात्रा को सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
छोटे शहरों के देवी मंदिरों पर भी ध्यान
धार्मिक पर्यटन को प्रमुख तीर्थस्थलों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय आस्था के केंद्रों तक विस्तार दिया जा रहा है। इस योजना में बिजनौर का मां रुक्मणी गाला माता मंदिर, पीलीभीत का गुंगा देवी मंदिर, देवरिया का करमेल माता मंदिर, ललितपुर का देवा माता मंदिर, बहराइच का मां गुल्ला वीर मंदिर, श्रावस्ती का मां जगत जननी सीता माता मंदिर और गौतम बुद्ध नगर का मां भुड़ावाली देवी मंदिर शामिल हैं।
इसके साथ ही रायबरेली, बांदा, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, जौनपुर और कानपुर नगर के विभिन्न देवी स्थलों को भी विकास योजनाओं से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ‘विजिट माय स्टेट, उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने लखनऊ से नैमिषारण्य और प्रयागराज से विंध्याचल के लिए साप्ताहिक पर्यटन यात्राएं शुरू की हैं। इन यात्राओं में भोजन, जलपान और स्थानीय गाइड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य आस्था को अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। मंदिरों में बेहतर प्रकाश व्यवस्था, पैदल मार्ग और विश्राम सुविधाएं विकसित होने से महिलाओं, बुजुर्गों और परिवारों के लिए धार्मिक यात्राएं आसान होंगी।
वहीं, श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, फूल-माला और प्रसाद विक्रेताओं, गाइडों तथा खानपान एवं ठहरने की सेवाओं से जुड़े लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल सकते हैं।
