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आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज से वसूली का आरोप, शिकायत के बाद नारायण अस्पताल ने लौटाए रुपये

*रिपोर्ट: अचल प्रताप सिंह

बरेली। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन पर बरेली में सवाल खड़े हुए हैं। बदायूं के एक मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि आयुष्मानy कार्ड होने के बावजूद उन्हें इलाज के लिए अपनी जेब से रुपये खर्च करने पड़े।

मामले की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर पहुंची तो स्वास्थ्य विभाग ने जांच की। जांच में मरीज का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत दर्ज नहीं मिला। इसके बाद अस्पताल से स्पष्टीकरण मांगा गया। मामले में अस्पताल ने मरीज के परिजनों को चेक के माध्यम से रकम वापस कर दी।

मामला बदायूं जिले की नगर पंचायत कुंवरगांव निवासी रामचंद्र से जुड़ा है। उनके बेटे शिव कुमार ने बरेली के रामपुर गार्डन स्थित नारायण अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज ok ok कराई थी।

शिकायत में कहा गया कि रामचंद्र के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला और इलाज के लिए परिजनों को रुपये खर्च करने पड़े।

शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उपचार से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई। जांच में रामचंद्र का इलाज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत दर्ज नहीं पाया गया। इसके बाद एक अक्टूबर 2026 को अस्पताल को पत्र जारी कर मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया।

अस्पताल के दावे और जांच रिपोर्ट में विरोधाभास

मामले में अस्पताल की ओर से दावा किया गया कि मरीज का इलाज आयुष्मान कार्ड के तहत ही किया गया था। साथ ही, परिजनों द्वारा खर्च की गई रकम के बिल उपलब्ध कराने पर भुगतान करने की बात कही गई। इसके बाद अस्पताल ने चेक जारी कर रकम वापस कर दी।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 16 अक्टूबर को शिव कुमार ने चेक प्राप्त किया और रकम वापस मिलने की लिखित पुष्टि भी की। इससे परिवार को आर्थिक राहत मिली, लेकिन इलाज को लेकर अस्पताल के दावे और विभागीय जांच के निष्कर्षों के बीच सवाल बने हुए हैं।

अस्पताल के डायरेक्टर ने जानकारी से किया इनकार

आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. अमित ने मामले की जानकारी दी। वहीं, नारायण अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने प्रकरण की जानकारी होने से इनकार किया।

अब सवाल यह है कि यदि मरीज का इलाज आयुष्मान योजना के तहत हुआ था, तो जांच में उसका रिकॉर्ड क्यों नहीं मिला? शिकायत के बाद रकम लौटाए जाने से परिजनों को राहत जरूर मिली है, लेकिन पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए अस्पताल के दावे और विभागीय रिकॉर्ड के बीच अंतर की पड़ताल अहम है।

 

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