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बोर्ड परीक्षाओं से पहले पढ़ाई पर जोर, हर 15 दिन में होगी शिक्षा विभाग की समीक्षा

बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए बचे समय का पूरा उपयोग करने की तैयारी है। जनगणना और चुनाव जैसे कार्यों के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में स्थानीय अवकाश कम रखने, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और कक्षाओं में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया गया है।

इसके लिए मंडलायुक्त और जिलाधिकारी प्रत्येक 15 दिन में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा करेंगे। दोनों विभागों की योजनाओं, शिक्षण व्यवस्था और निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए 30 बिंदुओं का एजेंडा तैयार किया गया है।

अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर समीक्षा बैठकों में इन बिंदुओं को शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा में निपुण भारत मिशन के लक्ष्य, निपुण मॉड्यूल, निपुण तालिका और यू-डायस के आंकड़ों को अद्यतन करने की स्थिति देखी जाएगी। इसके अलावा शिक्षकों के समायोजन, होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, बाल वाटिका, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और शिक्षक संकुल की बैठकों की उपयोगिता का भी आकलन होगा।

समग्र शिक्षा, पीएम श्री और पीएम पोषण योजनाओं के तहत एसएनए स्पर्श के माध्यम से धनराशि खर्च करने और स्कूल प्रबंधन समितियों को भुगतान की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत विद्यालयों की प्रतिपूर्ति और अभिभावकों को डीबीटी के जरिए भुगतान का ब्योरा भी लिया जाएगा।

पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, रसोइयों के मानदेय, कन्वर्जन कास्ट और उपमा-हलवा वितरण की स्थिति पर भी अधिकारियों की नजर रहेगी। इसके साथ ही रसोइया प्रतियोगिता की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।

शिक्षकों के चयन, प्रोन्नत वेतनमान, सेवानिवृत्ति देयों, लंबित एरियर और कैशलेस चिकित्सा योजना से जुड़े मामलों की प्रगति भी जांची जाएगी। उल्लास योजना के तहत निरक्षरों के चिह्नांकन, प्रशिक्षण और आकलन की स्थिति की समीक्षा होगी।

माध्यमिक विद्यालयों में प्रोजेक्ट अलंकार और नए प्रस्तावों की प्रगति देखी जाएगी। वहीं, बेसिक विद्यालयों में प्रेरणा और माध्यमिक विद्यालयों में परख मॉड्यूल के इस्तेमाल की स्थिति का आकलन किया जाएगा।

इसके अलावा जर्जर परिषदीय भवनों के अवशेषों की नीलामी, लंबित ध्वस्तीकरण, स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की सक्रियता की जांच होगी। जिलों में लंबित और चल रहे टेंडर, सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण की भौतिक प्रगति तथा राजकीय विद्यालयों में मिनी स्टेडियम की स्थिति भी समीक्षा के दायरे में रहेगी।

अधिकारियों को शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को सोशल मीडिया पर साझा करने पर भी जोर देने को कहा गया है। नियमित समीक्षा का उद्देश्य उपलब्ध शिक्षण अवधि का बेहतर इस्तेमाल करना, योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना और विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाना है।

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