लखनऊ, 30 अक्टूबर। विधान परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों पर पलटवार करते हुए उन पर चुनाव परिणामों को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जब चुनाव के नतीजे पक्ष में आते हैं तो अखिलेश यादव इसे जनसमर्थन बताते हैं, लेकिन हार मिलने पर चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं।
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने एमएलसी चुनाव के नतीजों के साथ शिक्षा व्यवस्था और समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर सपा प्रमुख को घेरा। पार्टी के प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने भी सपा सरकार के कार्यकाल की भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
‘सपा शासन में बदहाल थी शिक्षा व्यवस्था’
बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं थी।
उनके मुताबिक, शिक्षकों की नियुक्तियां समय पर नहीं होती थीं और कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने दावा किया कि कई जगह विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ता था।
दिनेश प्रताप सिंह ने सपा सरकार के कार्यकाल की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उस समय बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं थीं और वे स्कूल जाने में डर महसूस करती थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करने से पहले अपनी सरकार के कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए।
‘सपा चुनाव परिणाम स्वीकार करे, UCC पर बीजेपी प्रतिबद्ध’
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने दावा किया कि एमएलसी चुनाव में पार्टी की सीटों और मत प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने समाजवादी पार्टी से चुनाव परिणाम स्वीकार करने और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख किया। त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी संविधान की किताब का जिक्र तो करते हैं, लेकिन उसके प्रावधानों को गंभीरता से नहीं समझते।
उन्होंने कहा कि एनडीए की सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
‘सपा सरकार में योग्यता की होती थी अनदेखी’
बीजेपी प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने सपा सरकार के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्तियों में योग्यता के बजाय जातीय आधार पर प्राथमिकता दिए जाने की शिकायतें थीं।
उन्होंने सपा सरकार को ‘पर्ची-खर्ची’ वाली सरकार बताते हुए दावा किया कि युवाओं को नौकरी पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती थी।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार हर जिले में विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रदेश में तीसरी बार एनडीए की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनेगी।
