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आगरा में महिला आयोग की जनसुनवाई में छाए घरेलू हिंसा के मामले, पुलिस की कार्यशैली पर अध्यक्ष बबीता चौहान ने उठाए सवाल

रिपोर्ट : अमित शर्मा, आगरा

आगरा। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने आगरा के सर्किट हाउस में महिला जनसुनवाई की। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी शिकायतें लेकर पहुंचीं। जनसुनवाई में सबसे अधिक मामले घरेलू हिंसा से जुड़े सामने आए। लगातार इस तरह की शिकायतें मिलने पर आयोग की अध्यक्ष ने भी हैरानी जताई। उन्होंने महिला अपराधों से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर थाने स्तर पर ही पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुनकर उनका समाधान कर दिया जाए तो शायद उन्हें आयोग तक आने की जरूरत ही न पड़े।

बबीता चौहान ने कहा कि पुलिस को मित्र पुलिस के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, लेकिन जिस तरह घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न के मामले आयोग तक पहुंच रहे हैं, उससे लगता है कि अभी इस दिशा में और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिकायतों पर थानों में ही संवेदनशीलता के साथ सुनवाई होनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को बार-बार अलग-अलग जगहों पर भटकना न पड़े।

घरेलू विवादों को सुलझाने में परिवार की भी जिम्मेदारी

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों के लिए केवल एक पक्ष ही नहीं, बल्कि कई बार परिवार की भूमिका भी जिम्मेदार होती है। आपसी विवाद होने पर परिवार के लोगों को समझदारी दिखाते हुए दोनों पक्षों को समझाने और रिश्तों को बचाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटी के मायके वालों को भी परिस्थितियों को समझकर निर्णय लेना चाहिए।

बबिता चौहान ने स्पष्ट कहा कि बेटी कोई बोझ नहीं है। यदि किसी बेटी का ससुराल में उत्पीड़न हो रहा है तो उसके परिवार को मजबूती से उसके साथ खड़ा होना चाहिए। बेटी को अकेला छोड़ने के बजाय उसकी परेशानी को समझना और उसे उचित सहयोग देना परिवार की जिम्मेदारी है।

नाजायज मामलों में भी परिवार निभाए समझाने की भूमिका

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में शिकायत उचित नहीं है या आपसी गलतफहमी के कारण विवाद बढ़ रहा है तो परिवार को बेटी को समझाने का प्रयास करना चाहिए। हर मामले में जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बातचीत और समझदारी से रास्ता निकालने की जरूरत है। उनके मुताबिक, परिवार के लोग सही समय पर हस्तक्षेप करें तो कई घरों को टूटने से बचाया जा सकता है।

‘तेरे-मेरे सपने’ नाम से दिया नया संदेश

जनसुनवाई के दौरान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने ‘तेरे-मेरे सपने’ नाम से एक नया संदेश भी दिया। उन्होंने पारिवारिक रिश्तों में आपसी समझ, संवाद और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रिश्तों को बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों को जिम्मेदारी और समझदारी से काम लेना होगा।

जनसुनवाई में घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न की शिकायतों के बीच अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन के साथ-साथ परिवारों से भी अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की।

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