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ऐरवा कटरा रामलीला महोत्सव में धनुष यज्ञ का मंचन, पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता एलएस ने किया उद्घाटन

रिपोर्ट: अमित शुक्ला | औरैया

ऐरवा कटरा (औरैया)। ऐरवा कटरा में आयोजित 130वें आदर्श रामलीला महोत्सव के चौथे दिन ऐरवा टीकुर स्थित रामलीला मंच पर धनुष यज्ञ की लीला का भव्य मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के धनुष तोड़ने, राजा जनक के विलाप और लक्ष्मण-परशुराम के बीच हुए तीखे संवाद ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। देर रात से सुबह तक चले मंचन के दौरान रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों और तालियों से गूंजता रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ बिधूना विधानसभा के पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता एलएस ने फीता काटकर और भगवान श्रीराम की आरती-पूजन करके किया। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें पटका पहनाकर और भगवान श्रीराम का चित्र भेंटकर सम्मानित किया।

इस मौके पर पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता एलएस ने कहा कि अपने विधायक कार्यकाल के दौरान उन्होंने रामलीला मंच के निर्माण के लिए पांच लाख रुपये की स्वीकृति दिलाई थी, जिससे पक्का मंच और मैदान बनवाया गया। उन्होंने कहा कि यदि जनता के आशीर्वाद से उन्हें दोबारा सेवा का अवसर मिला, तो रामलीला मैदान और मंच के विकास के लिए 20 लाख रुपये की व्यवस्था कराई जाएगी।

धनुष यज्ञ की लीला ने बांधा समां

रामलीला के चौथे दिन कलाकारों ने रावण-बाणासुर संवाद, जनक विलाप, धनुष भंग और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का प्रभावशाली मंचन किया। सीता स्वयंवर में भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने के लिए देश-विदेश से आए बलशाली राजाओं ने अपनी ताकत आजमाई, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं सका।

राजाओं की असफलता देखकर राजा जनक निराश हो गए। उन्होंने दुखी होकर कहा कि क्या पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है? राजा जनक के इन वचनों से सभा में सन्नाटा छा गया। यह सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो उठे और उन्होंने भगवान श्रीराम के पराक्रम पर विश्वास जताते हुए अपने क्षत्रिय तेज का परिचय दिया।

इसके बाद रावण और बाणासुर के बीच संवाद का मंचन हुआ, जिसमें कलाकारों ने दोनों के अहंकार, वीरता और शक्ति का शानदार प्रदर्शन किया। अंत में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने शिव धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। धनुष टूटने की गर्जना से पूरा दरबार गूंज उठा।

लक्ष्मण-परशुराम संवाद पर गूंजती रहीं तालियां

शिव धनुष टूटने की खबर सुनकर भगवान परशुराम क्रोधित अवस्था में जनक दरबार पहुंचे। यहां लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखा संवाद हुआ। लक्ष्मण ने अपने व्यंग्यपूर्ण वचनों से परशुराम को चुनौती दी, जबकि परशुराम ने अपने फरसे और पराक्रम का बखान किया। दोनों पात्रों के बीच हुए संवाद ने दर्शकों में विशेष उत्साह भर दिया।

परशुराम की भूमिका फतेहपुर से आए बाबा व्यास पांडेय ने निभाई, जबकि लक्ष्मण की भूमिका कानपुर महानगर से आए अभिषेक त्रिपाठी ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत की। कलाकारों के अभिनय और संवाद अदायगी पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया। लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन रात एक बजे से सुबह नौ बजे तक चला।

कार्यक्रम में रामलीला कमेटी के प्रबंधक इंद्रप्रकाश तिवारी, अध्यक्ष एवं प्रधान सरमन सिंह, उपाध्यक्ष रानू पालीवाल, पूर्व प्रधान वीरेंद्र कुमार यादव, अरुण कुशवाह, मोहित कुशवाह, गौरव गुप्ता, पदम नारायण तिवारी, चंद्रशेखर गुप्ता, वीनू सक्सेना, कपिल गौतम, ब्रिगेडियर तिवारी, विकास चक्रवर्ती हिटलर सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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