रिपोर्ट: अजय पाल यादव
बदायूं। जिले के दहगवां विकासखंड के कोठा गांव में संचालित एक कथित क्लीनिक को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सहसवान-इस्लामनगर मार्ग पर स्थित इस क्लीनिक में इलाज करने वाले व्यक्ति की चिकित्सीय योग्यता और क्लीनिक के पंजीकरण को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है।
मामले में स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
फर्स्ट आई न्यूज की पड़ताल के दौरान क्लीनिक के अंदर अलमारियों में इंजेक्शन, एंटीबायोटिक, सिरप और अन्य दवाएं रखी दिखाई दीं। मौके पर मौजूद एक युवक ने कैमरे के सामने कथित तौर पर दावा किया कि यहां हर तरह की बीमारी का इलाज किया जाता है। हालांकि, क्लीनिक में दवाएं रखे होने या इलाज किए जाने मात्र से उसके अवैध होने की पुष्टि नहीं होती। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित दस्तावेजों और नियमों की जांच आवश्यक है।
डिग्री और पंजीकरण को लेकर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, यह क्लीनिक पश्चिम बंगाल निवासी सुधीर विश्वास से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, क्लीनिक के पंजीकरण और संबंधित व्यक्ति की चिकित्सीय योग्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि क्लीनिक नियमानुसार संचालित हो रहा है या नहीं और वहां मरीजों का इलाज करने वाला व्यक्ति आवश्यक योग्यता रखता है या नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण लोग इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं। लेकिन, संचालक की योग्यता और क्लीनिक की वैधानिक स्थिति की जानकारी नहीं होने से मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इंजेक्शन और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल की जांच जरूरी
किसी भी मरीज को बिना उचित चिकित्सकीय आकलन के दवाएं या इंजेक्शन देना नुकसानदायक हो सकता है। एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। ऐसे में क्लीनिक में उपलब्ध दवाओं के स्रोत, उनके भंडारण और मरीजों को इलाज देने के तरीके की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी नजरें
मामले में अब स्वास्थ्य विभाग की भूमिका अहम है। ग्रामीणों ने मांग की है कि क्लीनिक के पंजीकरण, संचालक की शैक्षणिक एवं चिकित्सीय योग्यता, दवाओं के स्रोत और इलाज की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, क्लीनिक को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सबसे अहम सवाल यही है कि ग्रामीणों को सुरक्षित और नियमानुसार चिकित्सा सुविधा मिल रही है या नहीं।
