सपनों को उड़ान तब मिलती है, जब शिक्षा, अवसर और आत्मविश्वास एक साथ जुड़ जाते हैं। उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) आज हजारों बेटियों के सपनों को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करने वाली छात्राएं अब प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग की पहल, शिक्षिकाओं के मार्गदर्शन और छात्राओं की मेहनत ने इन विद्यालयों को सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बेटियों के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत मंच बना दिया है।
अलीगढ़ के विकास खंड अतरौली स्थित केजीबीवी मढ़ौली की पूर्व छात्रा यामिनी वर्मा इसकी मिसाल हैं। वर्ष 2012 में कक्षा छह में प्रवेश लेने वाली यामिनी ने कठिन हालातों के बावजूद अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में प्रतियोगी परीक्षा पास की और 18 जून 2025 को इटावा में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति हासिल की।
यामिनी का कहना है कि केजीबीवी ने उन्हें केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी। शिक्षिकाओं के सहयोग और मार्गदर्शन ने उनके सपनों को नई ताकत दी।
इसी विद्यालय की पूर्व छात्रा मुनिशा यादव ने भी सफलता की प्रेरणादायक कहानी लिखी। वर्ष 2008 में कक्षा छह में दाखिला लेने वाली मुनिशा बचपन से ही पुलिस सेवा में जाना चाहती थीं। पढ़ाई के साथ उन्होंने नियमित व्यायाम और अनुशासित तैयारी को अपनी दिनचर्या बनाया। उनकी मेहनत रंग लाई और पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर 12 जुलाई 2018 को अमरोहा में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति प्राप्त की।
मुनिशा बताती हैं कि केजीबीवी ने उन्हें अनुशासन, आत्मनिर्भरता और बड़े सपने देखने की सीख दी। विद्यालय का माहौल हमेशा उन्हें लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा।
वहीं, विकास खंड गंगीरी की छात्रा कंचन ने भी अपनी मेहनत से सफलता का नया मुकाम हासिल किया। वर्ष 2010 में कक्षा आठ पास करने के बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और विज्ञान वर्ग से बीएससी की डिग्री पूरी की। इसके बाद कंचन ने पहले ही प्रयास में यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर परीक्षा पास कर 13 मार्च 2023 को सहारनपुर में सब इंस्पेक्टर पद पर ज्वाइन किया।
आज केजीबीवी की ये बेटियां यह साबित कर रही हैं कि मजबूत संकल्प और शिक्षा के दम पर किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। बेसिक शिक्षा विभाग की यह पहल अब हजारों बेटियों के जीवन में नई उम्मीद और नई उड़ान बनकर सामने आ रही है।
