छात्रों की समस्याओं के समाधान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जब भी छात्र प्रतिनिधि एवं छात्र नेता लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित करने का प्रयास करते हैं, तब प्रशासन द्वारा बार-बार मुख्य द्वार बंद कर उन्हें रोकने और अपमानित करने की कोशिश की जाती है। यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि छात्रों की आवाज को दबाने का भी प्रयास है।
विश्वविद्यालय प्रशासन को यह समझना होगा कि छात्र अपनी व्यक्तिगत मांगों के लिए नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रशासन के समक्ष जाते हैं। ऐसे में संवाद स्थापित करने के बजाय गेट बंद करना, छात्रों को घंटों बाहर खड़ा रखना और उनकी बात सुनने से इंकार करना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लगातार अपनाया जा रहा यह तानाशाहीपूर्ण रवैया, बदसलूकी और छात्रों को अपमानित करने की मानसिकता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि प्रशासन यह सोचता है कि गेट बंद करके, छात्रों को डराकर या उनका अपमान करके उनकी आवाज को दबाया जा सकता है, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है।
छात्र हितों से जुड़े हर मुद्दे पर संघर्ष पहले भी हुआ है और आगे भी होता रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को यह समझना चाहिए कि छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं। यदि उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा, तो छात्र समुदाय इसका सशक्त विरोध करेगा।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि छात्रों के सम्मान, अधिकार और भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा की जा रही गुंडई, बदतमीजी और अपमानजनक व्यवहार का लोकतांत्रिक लेकिन मजबूती के साथ जवाब दिया जाएगा। छात्र एकजुट हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।
छात्रों की आवाज को दबाने की नहीं, सुनने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन को टकराव की राजनीति छोड़कर संवाद और समाधान का रास्ता अपनाना चाहिए। अन्यथा छात्र आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
