Aparna Yadav ने लखनऊ में महिला आरक्षण बिल पारित न होने के विरोध में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाकर प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे “काली रात” बताते हुए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की वजह से महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा।इस मुद्दे पर यूपी में सियासी माहौल तेज हो गया है और आगे बड़े प्रदर्शन की तैयारी भी जताई गई है।
संसद में क्यों नहीं पास हुआ बिल?
महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन (131वां संशोधन बिल, 2026) लोकसभा में पास नहीं हो पाया। बिल को दो-तिहाई बहुमत चाहिए था, लेकिन जरूरी समर्थन नहीं मिला। वोटिंग में लगभग 298 पक्ष में और 230 विरोध में वोट पड़े। यह प्रस्ताव संसद और विधानसभाओं में 33% महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करने का था।
विवाद की असली वजह
बिल का विरोध सिर्फ आरक्षण को लेकर नहीं, बल्कि उससे जुड़े एक बड़े मुद्दे पर हुआ:
1. परिसीमन (Delimitation) से जोड़ना
सरकार ने महिला आरक्षण को सीटों के पुनर्गठन (delimitation) से जोड़ दिया।
विपक्ष का आरोप है कि इससे चुनावी नक्शा बदलकर राजनीतिक फायदा लिया जा सकता है।
2. राज्यों के बीच संतुलन का सवाल
दक्षिण भारत के राज्यों ने आशंका जताई कि नई सीटें बढ़ने से उनका प्रभाव कम हो सकता है।
3. “महिला आरक्षण vs राजनीति”
कई दलों ने कहा कि सरकार ने महिला मुद्दे को राजनीतिक रणनीति से जोड़ दिया।
सियासी बयानबाज़ी तेज
बीजेपी: विपक्ष पर “महिला विरोधी” होने का आरोप
विपक्ष: सरकार पर “राजनीतिक लाभ के लिए बिल फंसाने” का आरोप
यानी दोनों पक्ष महिला अधिकारों की बात कर रहे हैं, लेकिन तरीका और टाइमिंग पर टकराव है।
