वैश्विक कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी Nihilent Limited ने भारत में अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) प्रयासों को और मजबूत करते हुए Ayodhya Charitable Trust के साथ साझेदारी की है। इस पहल का उद्देश्य वंचित समुदायों, खासकर विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
निहिलेंट अपने मानव-केंद्रित विकास के दृष्टिकोण के तहत टेक्नोलॉजी, बुनियादी ढांचे और साझेदारी के माध्यम से समाज में मौजूद असमानताओं को कम करने की दिशा में काम कर रही है।
शिक्षा में डिजिटल सशक्तिकरण
शिक्षा क्षेत्र में कंपनी ने पुणे स्थित Bhatkya Vimukta Jati Shikshan Sanstha (बीवीजेएसएस) के आवासीय स्कूल में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया है। यहां इंटरनेट सुविधा के साथ एक आधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित की गई है और डिजिटल साक्षरता पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इससे घुमंतू और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के बच्चों को तकनीकी कौशल सीखने में मदद मिल रही है।
साथ ही, कैंपस में स्वच्छता और रहने की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक सैनिटेशन सिस्टम, पोषण और चिकित्सा सामग्री जैसी आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे छात्रों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग
स्वास्थ्य क्षेत्र में निहिलेंट ने नवी मुंबई और यवतमाल स्थित Sri Sathya Sai Sanjeevani Hospital के साथ मिलकर बाल हृदय देखभाल सेवाओं को मजबूत किया है। कंपनी ने एनेस्थीसिया मशीन और ICU मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं, जिससे सर्जिकल सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार हुआ है।
इसके अलावा, जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए जीवनरक्षक सर्जरी में भी सहयोग दिया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।
समावेशन की दिशा में कदम
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देते हुए निहिलेंट ने Ayodhya Charitable Trust के साथ मिलकर सुनने में अक्षम बच्चों के लिए विशेष पहल शुरू की है। इसके तहत डिजिटल हियरिंग एड, प्रशिक्षित शिक्षक और कंप्यूटर प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे इन बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा और अवसरों से जोड़ा जा सके।
कंपनी के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन L. C. Singh ने कहा कि निहिलेंट टेक्नोलॉजी को सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि समान अवसर और समावेशन को बढ़ावा देने का माध्यम मानती है। उनका उद्देश्य समुदायों को सशक्त बनाकर ऐसा भविष्य बनाना है, जहां किसी भी बच्चे को उसकी पृष्ठभूमि के कारण पीछे न रहना पड़े।
