निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर देश की प्रमुख धर्मनगरीयों में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। वाराणसी, हरिद्वार और मथुरा सहित कई धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने मंदिरों और पवित्र घाटों पर पहुंचकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी वर्ष की सभी 24 एकादशियों में विशेष महत्व रखती है। इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।
धर्मनगरीयों के मंदिरों और घाटों पर दिनभर भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का आयोजन होता रहा। कई स्थानों पर शोभायात्राएं भी निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना करते नजर आए।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शास्त्रों में निर्जला एकादशी को अत्यंत फलदायी व्रत बताया गया है। इस दिन सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक बिना जल ग्रहण किए उपवास रखने की परंपरा है। विशेष रूप से महिलाएं अखंड सौभाग्य, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या मधुमेह से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार व्रत करने की सलाह दी जाती है।
इस वर्ष निर्जला एकादशी विशेष शुभ संयोग में मनाई जा रही है। एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:12 बजे प्रारंभ हुई और 25 जून की रात 8:09 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 25 जून को निर्जला एकादशी व्रत रखा गया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत जीवन में सुख, समृद्धि, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन करते हैं।
