लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। बाराबंकी में अधिवक्ता के बेटे की हत्या के मामले को लेकर राजभर ने सपा प्रमुख पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह अपनी पार्टी के विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
राजभर ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘ए अखिलेश यादव जी, लोफर लौंडों के दम पर सत्ता के सपने मत देखिए। सपने से बाहर आकर सच्चाई देखिए।’ उन्होंने बाराबंकी के सपा विधायक धर्मराज उर्फ सुरेश यादव पर किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश का आरोप लगाया। राजभर के मुताबिक, जमीन विवाद में कथित तौर पर बाधा बन रहे अधिवक्ता राम मनोहर यादव के बेटे अभिनव यादव की हत्या कर दी गई।
अखिलेश की चुप्पी पर उठाए सवाल
सुभासपा प्रमुख ने सवाल किया कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद अखिलेश यादव ने इस मामले पर चुप्पी क्यों साध रखी है। उन्होंने कहा कि हत्या का शिकार हुआ युवक भी यादव समाज से था। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपने विधायक के खिलाफ इसलिए कुछ नहीं बोल रहे, क्योंकि वह उनकी ही पार्टी से जुड़ा है।
जौनपुर हत्याकांड का भी किया जिक्र
ओमप्रकाश राजभर ने जौनपुर की एक घटना को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने सपा विधायक लकी यादव पर विशाल यादव की हत्या के आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। राजभर ने दावा किया कि सपा प्रमुख अपने विधायक को संरक्षण देते रहे हैं।
मंत्री ने सपा नेताओं पर गुंडागर्दी, माफियागिरी और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जब अपने ही समाज के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार हो सकता है तो गैर-यादव पिछड़े और दलित समाज के लोगों के साथ कैसा बर्ताव होता होगा।
‘अगली पैदाइश तक सत्ता में नहीं आएंगे’
अखिलेश यादव पर हमला जारी रखते हुए राजभर ने कहा कि वह भेदभाव की राजनीति करते हैं और अपने लोगों को भी संभाल नहीं पा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव 2027 तो छोड़िए, अगली पैदाइश तक सत्ता में नहीं आएंगे।
राजभर ने कहा कि जनता सब देख और समझ रही है। वह ऐसा नेता नहीं चाहती, जो अपने लोगों को भी नियंत्रित न कर सके। विधानसभा चुनाव से पहले राजभर के इस बयान को सपा के खिलाफ सत्तारूढ़ गठबंधन के तीखे राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है।
