धूप में ज्यादा समय बिताने के बाद त्वचा पर टैनिंग होना एक आम समस्या है। हाल ही में छुट्टियों के बाद कई लोग शरीर और चेहरे पर टैनिंग की समस्या से परेशान नजर आ रहे हैं, जहां त्वचा का कुछ हिस्सा गहरा और कुछ हल्का हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टैनिंग त्वचा की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है, जो सूर्य की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों से बचाव के लिए होती है। जब त्वचा पर UV किरणें पड़ती हैं, तो मेलेनोसाइट कोशिकाएं अधिक मात्रा में मेलेनिन बनाती हैं, जिससे त्वचा का रंग गहरा हो जाता है।
डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि टैनिंग और पिग्मेंटेशन में अंतर होता है। टैनिंग आमतौर पर अस्थायी होती है और कुछ समय में अपने आप कम हो सकती है, जबकि पिग्मेंटेशन एक त्वचा विकार है, जिसके लिए चिकित्सकीय उपचार की जरूरत होती है।
त्वचा विशेषज्ञ टैनिंग हटाने के लिए विटामिन सी, नियासिनेमाइड, केमिकल पील और कुछ प्रोफेशनल ट्रीटमेंट्स की सलाह देते हैं। इनके अनुसार, इन उपायों से त्वचा का रंग धीरे-धीरे समान होने लगता है और स्किन डैमेज भी कम होता है।
इसके साथ ही डॉक्टरों का सुझाव है कि नियमित रूप से ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल किया जाए, धूप में बाहर निकलते समय पूरी आस्तीन के कपड़े, सनग्लास और टोपी का उपयोग किया जाए, और अत्यधिक धूप से बचा जाए।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि टैनिंग हटाने के लिए घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। नींबू, बेकिंग सोडा, सिरका या टूथपेस्ट जैसे उपाय त्वचा में जलन, एलर्जी, इंफ्लेमेशन और हाइपरपिग्मेंटेशन का कारण बन सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर त्वचा पर किसी भी तरह की समस्या बढ़ती है तो तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए और सोशल मीडिया पर वायरल घरेलू उपायों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।
