गुरुवार को सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी की पक्षकार बनने की अर्जी पर लघुवाद न्यायालय में सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन मामला अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-7, न्यायाधीश रजत शुक्ला की अदालत में स्थानांतरित होने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई
इससे पहले 5 मई को हुई सुनवाई में सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी के अधिवक्ता रईसउद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों (ऑपरेशन) का हवाला देते हुए समय मांगा था। अदालत ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए 9 जुलाई की तारीख तय की थी।
वादी कुंवर अजय तोमर ने 23 जुलाई 2024 को अपने अधिवक्ताओं शिव आधार सिंह तोमर और झम्मन सिंह रघुवंशी के माध्यम से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीक्षक पुरातत्वविद् तथा भारत संघ को प्रतिवादी बनाते हुए वाद दायर किया था। याचिका में सावन माह में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और अन्य हिंदू पर्वों पर पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग की गई है।
मामले में 23 फरवरी 2026 की सुनवाई के दौरान अदालत ने सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी पर बार-बार केस की नकल मांगने को लेकर ₹300 का जुर्माना भी लगाया था।
वादी कुंवर अजय तोमर ने दावा किया कि ताजमहल “तेजोमहालय” और भगवान शिव का मंदिर है। उन्होंने कहा कि सावन माह के चारों सोमवार को हिंदू श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और जलाभिषेक की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने ASI को पत्र भेजकर सावन के चार सोमवार के दौरान ताजमहल में हिंदू श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क प्रवेश की भी मांग की है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि उर्स और ईद के अवसर पर ताजमहल में विशेष व्यवस्था की जा सकती है, तो सावन के सोमवारों पर भी हिंदू श्रद्धालुओं के लिए समान व्यवस्था की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि ताजमहल को लेकर किए गए ऐतिहासिक दावे लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं और इन पर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय है। इन दावों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में विचाराधीन है।
