रिपोर्ट – ज्ञानेंद्र तिवारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पारंपरिक खान-पान और स्थानीय व्यंजनों को नई पहचान देने के लिए ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन क्यूजीन’ (ODOC) योजना शुरू की गई है। यह पहल प्रदेश के अलग-अलग जिलों से जुड़े पारंपरिक व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को संरक्षित करने के साथ उन्हें गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने पर केंद्रित है।
ODOC को उत्तर प्रदेश सरकार की ऐसी पहल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट पाक विरासत को सामने लाना और उससे जुड़े स्थानीय उद्यमियों, पारंपरिक कारीगरों, हलवाइयों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य छोटे कारोबारियों को आगे बढ़ने का अवसर देना है। आधिकारिक पोर्टल पर प्रदेश के 75 से अधिक जिलों की पारंपरिक खाद्य पहचान को प्रदर्शित किया गया है।
स्थानीय व्यंजनों की होगी ब्रांडिंग और मार्केटिंग
योजना के तहत पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता में सुधार, सुरक्षित और आधुनिक पैकेजिंग, लेबलिंग, फूड टेस्टिंग, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और बाजार तक पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग, प्रदर्शनियों और ब्रांड प्रमोशन के जरिए स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है।
सरकारी योजना के तहत ODOC से जुड़े उद्यमों को परियोजना लागत के आधार पर वित्तीय सहायता का प्रावधान भी है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पात्र परियोजनाओं के लिए मार्जिन मनी सहायता अधिकतम 50 लाख रुपये तक हो सकती है।
हर जिले के स्वाद को अलग पहचान
ODOC पोर्टल पर अलग-अलग जिलों के पारंपरिक व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा और माखन-मिश्री, वाराणसी का बनारसी पान और कचौरी, शामली की पलंग तोड़ मिठाई, प्रतापगढ़ के आंवला आधारित उत्पाद और कई अन्य स्थानीय व्यंजन शामिल हैं।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार की योजना के अनुसार, स्थानीय खान-पान को एक विशिष्ट पहचान मिलने से खाद्य क्षेत्र से जुड़े छोटे उद्यमों और स्थानीय कारोबारियों के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश आने वाले पर्यटकों को अलग-अलग जिलों की स्थानीय पाक परंपराओं से जोड़ने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। योजना के आधिकारिक विवरण में इसे पाक विरासत के संरक्षण के साथ रोजगार और पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
ODOC योजना को उत्तर प्रदेश के ODOP मॉडल की तर्ज पर स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक खान-पान को व्यापक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब इसके प्रभाव का आकलन योजना के जमीनी क्रियान्वयन, स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी और बाजार तक पहुंच के आधार पर होगा।
