लखनऊ, 10 जून। कभी बिजली संकट, अघोषित कटौती और कम आपूर्ति के लिए चर्चित रहने वाला उत्तर प्रदेश अब बिजली उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली क्षेत्र में हुए सुधारों के चलते प्रदेश में न केवल रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति हो रही है, बल्कि उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रदेश ने मई 2026 में 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा कर नया इतिहास रच दिया है। यह अब तक की सर्वाधिक बिजली आपूर्ति मानी जा रही है। भीषण गर्मी और बढ़ती मांग के बावजूद प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 में प्रदेश में अधिकतम 13,003 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी, जबकि वर्तमान में यह आंकड़ा दोगुने से भी अधिक स्तर तक पहुंच चुका है। वर्ष 2024-25 में 30,618 मेगावाट और वर्ष 2025-26 में 31,486 मेगावाट बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।
बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्तमान में जिला मुख्यालयों और महानगरों में लगभग 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.30 घंटे तक बिजली आपूर्ति हो रही है। इसके विपरीत वर्ष 2014 से 2017 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन केवल 11 घंटे बिजली मिल पाती थी।
बिजली उत्पादन क्षमता में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। मार्च 2014 में जहां उत्पादन क्षमता 4,839 मेगावाट थी, वहीं 31 मार्च 2026 तक यह बढ़कर 9,120 मेगावाट पहुंच गई है। यानी करीब 12 वर्षों में उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी हो गई है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश और सुधार किए गए हैं। इसका परिणाम है कि बढ़ती मांग के बावजूद उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
यूपीपीसीएल के निदेशक (वितरण) ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। आने वाले समय में भी उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने तथा बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।
