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योगी सरकार आयुष शिक्षा में लाएगी डिजिटल क्रांति, छात्रों को मिलेगी 3-डी एनाटोमेज टेबल सुविधा

उत्तर प्रदेश की Yogi Adityanath सरकार आयुष चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार अब आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा संस्थानों में छात्रों को मानव शरीर रचना विज्ञान (एनाटॉमी) की बेहतर और वैज्ञानिक पढ़ाई के लिए अत्याधुनिक 3-डी एनाटोमेज टेबल उपलब्ध कराने की तैयारी में है। यह तकनीक मेडिकल शिक्षा में डिजिटल क्रांति मानी जाती है और इसके जरिए छात्र बिना वास्तविक शव (कैडेवर) के भी मानव शरीर की जटिल संरचनाओं का गहराई से अध्ययन कर सकेंगे।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य आयुष चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक बनाना, छात्रों की व्यावहारिक समझ को मजबूत करना और तकनीक आधारित अध्ययन को बढ़ावा देना है। खास बात यह है कि इस सुविधा के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश का चौथा राज्य बन जाएगा, जहां आयुष चिकित्सा संस्थानों में 3-डी एनाटोमेज टेबल का उपयोग किया जाएगा।

क्या है 3-डी एनाटोमेज टेबल?

3-डी एनाटोमेज टेबल एक अत्याधुनिक डिजिटल उपकरण है, जिसे “डिजिटल शवगृह” भी कहा जाता है। यह बड़ी टच-स्क्रीन आधारित प्रणाली होती है, जिसमें वास्तविक मानव शरीर के हाई-रिजॉल्यूशन 3-डी मॉडल मौजूद रहते हैं। इसके जरिए छात्र मानव शरीर की त्वचा, मांसपेशियां, नसें, हड्डियां, रक्त वाहिकाएं और आंतरिक अंगों को परत-दर-परत देखकर समझ सकते हैं।

इस तकनीक की सबसे खास बात वर्चुअल डिसेक्शन यानी आभासी विच्छेदन है। इसमें किसी वास्तविक शव की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि डिजिटल मॉडल के माध्यम से शरीर के हर हिस्से का अध्ययन किया जाता है। छात्र स्क्रीन को टच करके शरीर के अंगों को घुमा सकते हैं, ज़ूम कर सकते हैं और अलग-अलग कोणों से देख सकते हैं। इससे पढ़ाई अधिक आसान, सुरक्षित और इंटरैक्टिव बन जाती है।

लखनऊ के तीन प्रमुख आयुष संस्थानों को मिलेगी सुविधाआयुष विभाग के अनुसार, शुरुआत में यह सुविधा लखनऊ स्थित तीन प्रमुख सरकारी संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें

राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज राजकीय तकमील-उत्तिब यूनानी कॉलेज शामिल हैं।इन संस्थानों के छात्र अब आधुनिक डिजिटल माध्यम से एनाटॉमी की पढ़ाई कर सकेंगे। इससे न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण में भी काफी मदद मिलेगी।

शवों की कमी की समस्या का मिलेगा समाधान

मेडिकल शिक्षा में लंबे समय से शवों की उपलब्धता बड़ी चुनौती रही है। सीमित संसाधनों और कैडेवर की कमी के कारण कई संस्थानों में छात्रों को व्यावहारिक अध्ययन में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे में 3-डी एनाटोमेज टेबल इस समस्या का प्रभावी समाधान साबित हो सकती है।

आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक Chaitra V ने बताया कि सरकार ने आधुनिक डिजिटल तकनीक को चिकित्सा शिक्षा से जोड़ने की रणनीति तैयार की है, ताकि छात्र बेहतर तरीके से शरीर रचना विज्ञान को समझ सकें और उन्हें आधुनिक मेडिकल शिक्षा का अनुभव मिल सके।

इलाज और सर्जरी में भी होगी मदद

यह तकनीक केवल छात्रों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 3-डी एनाटोमेज टेबल चिकित्सा उपचार और सर्जरी की योजना बनाने में भी काफी उपयोगी साबित हो रही है। इसमें मरीजों के सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन अपलोड कर उनका त्रि-आयामी मॉडल तैयार किया जा सकता है। इससे डॉक्टरों को बीमारी की सटीक पहचान करने और बेहतर उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है।

देश के चुनिंदा संस्थानों में ही उपलब्ध है सुविधा

फिलहाल देश के कुछ चुनिंदा संस्थानों में ही यह हाईटेक सुविधा मौजूद है। दिल्ली स्थित All India Institute of Ayurveda में वर्चुअल डिसेक्शन के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा National Institute of Ayurveda और SDM Ayurveda College में भी यह तकनीक इस्तेमाल हो रही है।

अब उत्तर प्रदेश में इस सुविधा की शुरुआत होने के बाद आयुष चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों की क्लीनिकल समझ बेहतर होगी और भविष्य में अधिक  दक्ष चिकित्सक तैयार किए जा सकेंगे।

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