लखनऊ। उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक अस्मिता के संरक्षण को लेकर पर्वतीय महापरिषद का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने बीरबल साहनी मार्ग स्थित भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन को संरक्षित रखने और इसके वर्तमान स्वरूप को बनाए रखने की मांग उठाई।
पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी तथा उत्तराखंड महापरिषद के अध्यक्ष हरीश चंद्र पंत ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि नगर निगम द्वारा पर्वतीय समाज के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए आवंटित इस उपवन के संचालन हेतु लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने किसी बाहरी संस्था को जिम्मेदारी देने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस निर्णय को लेकर पर्वतीय समाज में असंतोष है। उनका कहना है कि यदि उपवन का संचालन किसी बाहरी संस्था को सौंपा गया तो यहां वर्षों से आयोजित होने वाले सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।
गौरतलब है कि इस उपवन में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर 15 दिवसीय ‘उत्तरायणी कौथिग’ तथा नवंबर माह में 10 दिवसीय ‘उत्तराखंड महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा हरेला, फूलदेई समेत उत्तराखंड की महान विभूतियों की जयंती और पुण्यतिथि पर भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से उपवन की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने और पर्वतीय समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए आवश्यक कदम उठाने की मांग की। इस दौरान के.एन. चंदोला, महासचिव हरीश कुमार बिष्ट सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
