लद्दाख से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की हिरासत को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है।
गृह मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी भरोसे का माहौल बनाने के लिए उठाया गया है।
26 सितंबर 2025 को लिया गया था हिरासत में
दरअसल, सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। इससे दो दिन पहले लेह में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई गई थी।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और 45 से ज्यादा लोग घायल हुए थे, जिनमें 22 पुलिसकर्मी भी शामिल थे। इसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।
जोधपुर जेल में किया गया था स्थानांतरित
हिरासत के बाद उन्हें जोधपुर की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था। प्रशासन का कहना था कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।
शांति और बातचीत के लिए सरकार की पहल
अब गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार लद्दाख में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों के साथ सार्थक और रचनात्मक बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए वांगचुक की हिरासत खत्म करने का फैसला लिया गया है।
सरकार का कहना है कि वह लद्दाख के अलग-अलग समुदायों, नेताओं और संगठनों से लगातार बातचीत कर रही है ताकि लोगों की चिंताओं और मांगों का समाधान निकाला जा सके।
हड़ताल और विरोध से प्रभावित हुई स्थानीय अर्थव्यवस्था
सरकार ने यह भी माना कि हाल के समय में हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों की वजह से क्षेत्र के शांतिपूर्ण माहौल पर असर पड़ा है। इसका प्रभाव छात्रों, नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं, व्यापारियों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी चुनौती
इससे पहले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 10 मार्च की तारीख तय की थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या वांगचुक के भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट वास्तव में भड़काऊ थे और क्या उनका 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा से कोई सीधा संबंध था।
आंदोलन की दिशा में आ सकता है नया मोड़
अब केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद लद्दाख की राजनीति और वहां चल रहे आंदोलन की दिशा में नया मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है।
