पाकिस्तान से विस्थापित 1,645 परिवारों एवं पूर्व सैनिकों/लीजधारकों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने गौमाता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इन दिनों कुछ मौलवी और मौलाना गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति में गाय को पहले से ही माता का दर्जा प्राप्त है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने कहा कि गौ हमारी माता है, जन्म-जन्मांतर का नाता है। क्या माँ और पुत्र के रिश्ते को किसी घोषणा की आवश्यकता होती है? क्या किसी पुत्र को यह बताने की जरूरत पड़ती है कि उसकी माँ कौन है?” उन्होंने कहा कि गाय को माता मानना भारतीय संस्कारों का हिस्सा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गौमाता को किसी के द्वारा राष्ट्रमाता घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह भारतीय समाज में स्वतः ही राष्ट्रमाता के रूप में सम्मानित हैं। उन्होंने कहा कि जैसे अपनी माता के बारे में किसी परिचय की आवश्यकता नहीं होती, उसी प्रकार गौमाता और गंगा माता के महत्व को भी किसी प्रमाण या घोषणा की जरूरत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में मां गंगा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज गंगा को माता मानता है, उसकी आरती और पूजा करता है तथा अपने धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कार गंगा के तट पर संपन्न करता है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है, जिसे किसी बाहरी व्यक्ति या आक्रांता से प्रमाणित कराने की आवश्यकता नहीं है।
समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि गौ और गंगा के प्रति सम्मान भारतीय जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग है तथा यह भावना समाज में स्वाभाविक रूप से मौजूद है।
